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ईरान युद्ध के बाद पाकिस्तान को निशाना बनाएगा इजरायल? इस्लामाबाद में डर, कितना गंभीर है खतरा


इजरायल और अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद पश्चिम एशिया इस समय युद्ध की चपेट में है। इजरायल की ओर से लेबनान और गाजा में भी हमले किए जा रहे हैं। इजरायल के आक्रामक रुख के चलते पाकिस्तान में काफी समय से यह अंदेशा जताया जाता रहा है कि उसको भी निशाना बनाया जा सकता है। पाकिस्तान के नेता और एक्सपर्ट इस बात को कहते रहे हैं कि इजरायल की नजर उन पर लगी हुई है। ऐसा अंदेशा है कि इजरायल के निशाने पर ईरान के बाद पाकिस्तान आ सकता है।
दक्षिण एशिया के शोधकर्ता अल्ताफ परवेज ने प्रोथोमोलो में अपने लेख में कहा है कि ईरान के बाद पाकिस्तान पर इजरायली हमले की बात कुछ अजीब लग सकता है। हालांकि इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र और इस्लामिक सहयोग संगठन जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की कमजोर स्थिति और भारत की मौजूदा सरकार की इजरायल से करीबी पाकिस्तान के लिए खतरा बढ़ाती है।
पाकिस्तान बनेगा इजरायल का टारगेट? – पाकिस्तान में पॉलिसी बनाने वालों ने कई बार कहा है कि उनका देश इजरायल का टारगेट बन सकता है। पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने 3 मार्च को कहा है कि ईरान में इजरायल का कंट्रोल आया तो इसका असर पाकिस्तान तक पहुंचेगा। ईरान के बाद भारत और अफगानिस्तान की मदद से इजरायल की कोशिश पाकिस्तान को कमजोर करने की होगी।
ख्वाजा के बयान के बाद सवाल उठा है कि इजरायल हकीकत में पाकिस्तान के लिए कितना बड़ा खतरा है? दुनिया में कई देशों के पास न्यूक्लियर हथियार हैं। पाकिस्तान के पास वही टेक्नोलॉजी है तो इजरायल को क्या दिक्कत है। यह सवाल जायज लगता है लेकिन इजरायल किसी तर्क पर जाने के बजाय बस इतना कहता है कि किसी मुस्लिम-बहुल देश के पास न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी ना हो।
ग्रेटर इजरायल का सपना – इजरायल ने बार-बार यह संकेत दिया है कि वह नहीं चाहता कि कोई सैन्य रूप से ताकतवर मुस्लिम-बहुल देश उसके ‘ग्रेटर इजरायल’ के सपने का विरोध कर सके। इजरायल का तर्क है कि अगर कोई मुस्लिम-बहुल देश परमाणु हथियार हासिल कर लेता है तो फिर दूसरे इस्लामी देशों में भी यह कोशिश फैल सकती है।
पाकिस्तान और इजरायल 3,000 किलोमीटर दूर हैं और पड़ोसी नहीं हैं। ऐसे में इजरायल का पाकिस्तान से सीधा टकराव नहीं दिखता है। पाकिस्तान का ईरान के साथ एक लंबा बॉर्डर है। ऐसे में ईरान में अगर इजरायल के इशारे वाली कोई सरकार बन जाती है तो फिर जरूर इस्लामाबाद में एक सीधा प्रभाव दिख सकता है।
पाकिस्तान के सऊदी, तर्की से संबंध – इजरायल को लगता है कि पाकिस्तान की मिलिट्री ताकत उसके लिए चुनौती बन सकती है। पाकिस्तान का हालिया महीनों में तुर्की और सऊदी अरब के साथ बढ़ी मिलिट्री पार्टनरशिप खासतौर से इजरायल के लिए खास तौर पर चिंता की बात हैं। इजरायली स्ट्रेटजिस्ट का अंदाजा है कि इस्लामिक नाटो जैसा ब्लॉक भविष्य में उन पर दबाव डाल सकता है। ये बातें पाकिस्तान और इजरायल में तनाव बढ़ा सकती हैं।