
एमपी- एमएलए की विशेष अदालत ने पवार परिवार को बड़ी राहत दी है। स्पेशल कोर्ट ने आर्थिक अपराध शाखा की 25,000 करोड़ रुपये के महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) घोटाले की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। इस घोटाले में दिवंगत अजित पवार, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और उनके भतीजे रोहित पवार का नाम शामिल था। अदालत ने कई मामलों में कहा कि ऋण आवंटन के कारण बैंक को कोई हानि नहीं हुई और निष्कर्ष निकाला कि निदेशकों ने कोई व्यक्तिगत अनुचित लाभ प्राप्त नहीं किया। अदालत ने माना कि आरोपियों ने कोई आपराधिक साजिश नहीं रची।
रोहित की कंपनी, बारामती एग्रो को राहत देते हुए अदालत ने कहा कि 2012 में कन्नड़ सहकारी चीनी कारखाने की नीलामी में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था। 127 पृष्ठों का विस्तृत संयुक्त आदेश सोमवार को उपलब्ध कराया गया।
स्पेशल कोर्ट ने क्या कहा – आरोप एमएससीबी के अंतर्गत आने वाले 31 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों पर केंद्रित थे, जिन्होंने चीनी कारखानों को ऋण दिए थे, जो बाद में डिफ़ॉल्ट हो गए। आरोप था कि इन कारखानों की बाद की नीलामी में बैंक पदाधिकारियों के परिजनों को लाभ पहुंचाया गया था। लेकिन, विशेष न्यायाधीश महेश के. जाधव ने इन्हें आपराधिक कृत्यों के बजाय प्रशासनिक दीवानी गलतियां की श्रेणी में रखा। पांच संस्थाओं के मामले में आरोप लगाया गया था कि अजित पवार सहित एमएससीबी के निदेशक मंडल ने अवैध ऋण स्वीकृत किए और उन इकाइयों को अनुकूल शर्तें प्रदान कीं जिनमें उनके वित्तीय या व्यक्तिगत हित थे।
अन्ना हजारे की याचिका खारिज – न्यायाधीश ने कहा कि आधिकारिक वैधानिक रिपोर्ट, गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य संज्ञेय अपराधों के घटित होने को सिद्ध नहीं करते हैं। इसलिए, मूल शिकायतकर्ता की याचिका सहित सभी विरोध याचिकाएं खारिज किए जाने योग्य हैं। ‘सी’ सारांश रिपोर्ट (समापन रिपोर्ट) स्वीकार की जानी चाहिए। न्यायाधीश ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे सहित 50 व्यक्तियों की विरोध याचिकाएं खारिज कर दीं, जिन्होंने क्लीन चिट का विरोध किया था।
कोर्ट ने कहा- चूक को क्राइम नहीं मान सकते – न्यायाधीश ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से आपराधिक इरादे (धोखा देने का इरादा) का कोई प्रमाण नहीं मिलता है। केवल नाबार्ड के कुछ निर्देशों का पालन न करने मात्र से संज्ञेय अपराध नहीं बनता… मात्र अनियमितता या चूक को अपराध नहीं माना जा सकता। अभियुक्त की ओर से बेईमानी या कपटपूर्ण इरादे का अभाव है। लोक सेवक को सौंपी गई संपत्ति का बेईमानी, कपटपूर्ण उपयोग या निजी इस्तेमाल के लिए गबन का कोई मामला नहीं है… कोई भी दस्तावेज जाली नहीं है।
मित्रा पैकेज पर कोर्ट ने कही यह बात – न्यायाधीश ने पाया कि निदेशकों के कार्यों पर ‘मित्रा पैकेज’ जैसे विशेष राहत पैकेजों का व्यापक प्रभाव था, जिन्हें वित्तीय संकट के समय चीनी उद्योग को सहायता प्रदान करने के लिए बनाया गया था। ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि जांच में लापरवाही बरती गई है। ऐसा प्रतीत नहीं होता कि सबूतों से छेड़छाड़ की गई है या यह कोई मनगढ़ंत जांच है। न्यायाधीश ने बताया कि वसूली प्रक्रिया जारी है और अब तक 850 करोड़ रुपये वसूल किए जा चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एमएससीबी सहकारी समितियों को वित्त पोषित कर रहा है और जनता के धन की रक्षा कर रहा है।
सुनेत्रा पवार का नाम ईडी ने जोड़ा था – जारंदेश्वर चीनी कारखाने के खिलाफ अनियमितताओं के आरोपों पर, जिसमें ईडी ने अजित पवार और सुनेत्रा को जोड़ा था। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि ये लेनदेन आपराधिक अपराध नहीं बनते हैं। जय अंबिका चीनी कारखाने को अजित पवार सहित बैठकों में बिना किसी गिरवी के 94.9 करोड़ रुपये का ऋण दिए जाने के आरोप पर, न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि वर्षों पहले सरकारी गारंटी प्राप्त की गई थी और बैंक ने सहकारी अदालत के माध्यम से सक्रिय रूप से वसूली की मांग की थी।
Home / News / अजित पवार और सुनेत्रा पवार के खिलाफ 25000 करोड़ का MSC बैंक स्कैम केस बंद, कोर्ट ने कहा- कोई क्राइम नहीं हुआ
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