
ईरान युद्ध ने मिडिल ईस्ट की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया है। खाड़ी में नये समीकरण दिखने लगे हैं। तेहरान ने अमेरिका से चल रहे युद्ध के दौरान इजरायल से भी ज्यादा मिसाइल और ड्रोन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर गिराए, उसके तेल संसाधनों पर हमले किए। जिसके बाद यूएई ने भी मिराज-2000 विमानों से ईरान के तेल रिफाइनरी को तबाह कर दिया। ईरानी मिसाइलों से सुरक्षा के लिए इजरायल ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को अबू धाबी की सुरक्षा के लिए भेज दिया था। इन तमाम घटनाओं ने यूएई और सऊदी के बीच की दूरी को और बढ़ा दिया है।
नया समीकरण ये बन रहा है कि इजरायल और यूएई करीब आ चुके हैं जिससे ईरान के साथ अबू धाबी के संबंध और खराब होंगे। सऊजी अरब के साथ पहले ही यूएई के संबंधों में दूरी आ चुकी थी और ये फासला और बढ़ेगा। इसके अलावा अरब के कई देश अभी भी इजरायल को ‘दुष्ट देश’ मानते हैं जिसका असर आने वाले वक्त में दिखेगा। फिलहाल के लिए फोकस सऊदी अरब, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात पर रहने वाला है।
UAE और इजरायल के बीच मजबूत हुए रिश्ते – चैथम हाउस में मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका प्रोग्राम की डायरेक्टर सनम वकील ने एएफपी की एक रिपोर्ट में कहा है “UAE भविष्य के बारे में सोच रहा है और इजरायल को सबसे अच्छा सुरक्षा पार्टनर मानता है जो उसकी आर्थिक रिकवरी के लिए सुरक्षा कवच दे सकता है।” सुरक्षा और रक्षा के मामले में उनकी यह दांव सफल होती दिख रही है। मंगलवार को इजरायल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने इस बात की पुष्टि की कि युद्ध के दौरान इजरायल ने अपनी ‘आयरन डोम’ एयर डिफेंस बैटरियां और सैनिक UAE भेजे थे। आपको बता दें कि 2020 में बहरीन के साथ यूएई ने भी इजरायल को मान्यता दी थी और ऐसा करने वाला वो पहले इस्लामिक देशों में था।
UAE सरकार के करीबी लेबनानी-अमीराती मीडिया एग्जीक्यूटिव और नीति सलाहकार नदीम कोटेइच ने एएफपी से कहा “तत्काल कार्रवाई की भावना पर्याप्त नहीं थी जबकि यह देश की स्थापना के बाद से हमारे सामने आया सबसे बड़ा अस्तित्वगत खतरा है। लेकिन इस युद्ध में जब UAE को जरूरत थी तब इजरायली उसके साथ खड़े हुए।” अमीराती इन्फ्लुएंशर और कुछ अधिकारियों ने ईरान युद्ध खत्म होने के बाद इजरायल के साथ सहयोग को उसके लिए सबसे आदर्श स्थिति के दौर पर पेश करना शुरू कर दिया है। पिछले महीने UAE के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश ने कहा था कि इस क्षेत्र में ईरान की “रणनीति” के परिणामस्वरूप खाड़ी में इजरायल और अमेरिका का प्रभाव और बढ़ेगा।
UAE और सऊदी अरब में और बढ़ा दरार – दोनों देशों के बीच के संबंध ईरान युद्ध से पहले यमन विवाद के बाद ही खराब होने लगे थे। इजरायल और यूएई की दोस्ती सऊदी को और दूर करेगा। अबू धाबी ने संकेत दिया है कि वह अपना अलग रास्ता बना रहा है भले ही इसका मतलब पारंपरिक गठबंधनों को छोड़ना हो। यूएई ने इस महीने सऊदी के दबदबे वाले OPEC से बाहर निकलने का ऐलान कर दिया और उसने अरब लीग की कड़ी आलोचना भी की है। नई दिल्ली में BRICS की बैठक के दौरान भी ईरान के साथ उसका टकराव साफ नजर आया। यूएई ने अब ईरान को दुश्मन करार दिया है। UAE के रुख के बारे में कोटेइच ने कहा “कुछ लोग ऐसे हैं जो इजरायली वर्चस्व के विचार को लेकर जुनूनी हैं और कुछ ऐसे हैं जो ज्यादा व्यावहारिक हैं और इसे किसी भी दूसरे देश की तरह देखते हैं… कि हम इसे इस क्षेत्र में शामिल कर सकते हैं।”
Home / News / दुश्मन का दुश्मन दोस्त? ईरान के हमलों ने बदला मिडिल ईस्ट का ‘नक्शा’, सऊदी को छोड़ इजरायल के पाले में पहुंचा UAE
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