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समुद्र में डूबते नीदरलैंड ने बना दी 32KM लंबी जादुई दीवार, भारत में ‘जल क्रांति’ ला सकता है यह वाटर मॉडल


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नीदरलैंड्स के मशहूर अफस्लूटडाइक (Afsluitdijk) बांध का दौरा किया है। इस दौरान उन्होंने इस प्रोजेक्ट को “क्रांतिकारी” बताया और जल प्रबंधन की इस संरचना की सराहना करते हुए इसे “अग्रणी कार्य” कहा। PM मोदी ने कहा कि नीदरलैंड्स ने जल संसाधनों के क्षेत्र में अग्रणी कार्य किया है और वैश्विक समुदाय उसके अनुभव से सीख ले सकता है। पीएम मोदी की इस यात्रा का मकसद यह समझना था कि समुद्र के खारे पानी को रोककर मीठे पानी की विशाल झील कैसे बनाई जाती है ताकि भारत में भी ऐसा ही एक महा-प्रोजेक्ट बनाया जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने अफस्लूटडाइक बांध का दौरा करने के बाद कहा “एक ऐसा क्षेत्र जिसमें नीदरलैंड्स ने जबरदस्त काम किया है वह है जल प्रबंधन। पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय इससे बहुत कुछ सीख सकता है। आज सुबह मुझे अफस्लूटडाइक जाने और इस प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताओं के बारे में जानकारी हासिल करने का मौका मिला। मैं प्रधानमंत्री रॉब जेट्टेन का आभारी हूं जो यहां मेरे साथ आए। हम भारत में आधुनिक तकनीक लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिसका उद्देश्य सिंचाई, बाढ़ से सुरक्षा और अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क के विस्तार में मदद करना है।”
नीदरलैंड के अफस्लूटडाइक बांध का महत्व क्या है? – अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने बांध की मुख्य विशेषताओं का निरीक्षण किया है जिसने 90 से ज्यादा सालों से इस निचले इलाके वाले देश को बाढ़ से बचाया है।
यह नीदरलैंड का 32 किलोमीटर लंबा एक ऐतिहासिक समुद्री बांध है। – इसे लगभग 90 साल पहले समुद्र के पानी को रोकने के लिए बनाया गया था।
इस बांध ने समुद्र के खारे पानी को अंदर आने से रोक दिया जिससे अंदर की तरफ ‘इज्सेलमीर’ (IJsselmeer) नाम की मीठे पानी की दुनिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झील बन गई।
इसने नीदरलैंड को बाढ़ से बचाया और देश को पीने और खेती के लिए मीठा पानी दिया। – भारत की कल्पसार परियोजना का लक्ष्य भी खंभात की खाड़ी के पार 30 किलोमीटर लंबा बांध बनाना है जिससे एक ऐसा जलाशय तैयार हो सके जो समुद्री वातावरण में दुनिया का सबसे बड़ा ताजे पानी का जलाशय बन सकता है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में इस बांध की गुजरात की महत्वाकांक्षी कल्पसार परियोजना के लिए सीधी इंजीनियरिंग प्रासंगिकता पर जोर दिया। बयान में कहा गया “कल्पसार परियोजना का लक्ष्य खंभात की खाड़ी के पार एक ताजे पानी का जलाशय बनाना है जिसमें ज्वारीय बिजली उत्पादन, सिंचाई और परिवहन के बुनियादी ढांचे को एकीकृत किया जाएगा।”