Friday , October 16 2026 11:38 AM
Home / News / ‘CEC को नहीं मिलना चाहिए कोई विशेषाधिकार’, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की खरी-खरी

‘CEC को नहीं मिलना चाहिए कोई विशेषाधिकार’, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की खरी-खरी


सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस कुरियन जोसेफ ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर अहम सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को व्यक्तिगत तौर पर कोई विशेषाधिकार नहीं मिलना चाहिए। ताकत किसी व्यक्ति के बजाय संस्था में निहित होनी चाहिए।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व जस्टिस कुरियन जोसेफ ने ये बातें इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स, केरलम की ओर से आयोजित ‘इंडिपेंडेंस ऑफ इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया: कॉम्प्रोमाइज्ड?’ विषय पर एक सेमिनार के उद्घाटन सत्र में कहीं।
‘मुख्य चुनाव आयुक्त को नहीं मिलने चाहिए कोई विशेषाधिकार’ – पूर्व जस्टिस कुरियन जोसेफ ने कहा, ‘मुख्य चुनाव आयुक्त को अपने आप में कोई विशेष विशेषाधिकार नहीं मिलना चाहिए। यह एक संस्था है, कोई व्यक्ति नहीं।’ जस्टिस जोसेफ के मुताबिक, देश में उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के बीच यह गलत धारणा बन गई है कि सारी शक्ति व्यक्ति में केंद्रित होती है। उन्होंने कहा कि अगर शक्तियों का इस्तेमाल संस्थागत तरीके से हो, तो फैसले लेने से पहले दो बार सोचना पड़ेगा।
‘क्या लोकतंत्र की जड़ में जहर घोल दिया गया है?’ – कुरियन जोसेफ ने संविधान सभा की बहसों का जिक्र करते हुए चुनाव कराने वाले अधिकारियों की ईमानदारी और निष्पक्षता के महत्व के बारे में भी बात की। उन्होंने संविधान सभा के सदस्य हृदयनाथ कुंजरू की चिंताओं का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव कराने वाले पदाधिकारियों की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
लाइव लॉ के मुताबिक, जस्टिस जोसेफ ने कहा, ‘अगर उस पद पर बैठे व्यक्ति की सत्यनिष्ठा बेदाग नहीं है, तो लोकतंत्र की जड़ में जहर घुल जाएगा।’ उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या देश में संविधान की परिकल्पना के अनुरूप काम नहीं करने वाले लोगों के हाथों लोकतंत्र को नुकसान नहीं पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि यह समय देश के लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने पर विचार करने का है। उनके मुताबिक, जब निर्वाचन आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्था को संवैधानिक शक्तियां सौंपी गई हैं, तो उसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया में बदलाव की वकालत – पूर्व न्यायाधीश ने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया तथा उनकी सेवा शर्तों को संसद के बनाए कानूनों के बजाय सीधे संविधान में संरक्षण मिलना चाहिए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सभी चुनाव आयुक्तों को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के समान होनी चाहिए। उनके अनुसार, इससे निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता को अधिक मजबूत संवैधानिक आधार मिल सकेगा।
जोसेफ ने संविधान के अनुच्छेद 324 का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची तैयार कराने और चुनावों के संचालन पर अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करती है।