
शादी का नाम सुनते ही अगर कोई युवा पीछे हट जाए, तो अक्सर लोग कह देते हैं कि आज की पीढ़ी जिम्मेदारी से बच रही है। कोई इसे करियर से जोड़ देता है, तो कोई बदलती सोच को वजह मान लेता है। लेकिन हर बार कहानी इतनी आसान नहीं होती। कई बार शादी का डर बाहर की दुनिया नहीं, बल्कि घर के अंदर देखे गए रिश्तों से शुरू होता है। शायद यही वजह है कि आज कई युवा शादी से पहले अपने मन के डर से लड़ रहे हैं, जिसके बारे में खुलकर बात कम ही होती है।
बच्चे सिर्फ सुनते नहीं देखते भी हैं – सोशल मीडिया पर लाइफ कोच रवीना अरोड़ा ने एक पोस्ट शेयर कर कहा कि बच्चे सिर्फ अपने माता-पिता की बातें नहीं सुनते, बल्कि हर दिन उनके रिश्ते को भी देखते हैं। अगर घर में प्यार से ज्यादा नाराजगी, झगड़े या दूरी दिखती है, तो उनके मन में शादी की तस्वीर भी वैसी ही बनने लगती है।
यहीं से बढ़ने लगता है शादी का डर – पोस्ट में रवीना अरोड़ा ने बताया कि उनके पास आने वाले कई क्लाइंट्स भी यही बात कहते हैं। उनका कहना होता है कि उन्होंने बचपन से घर में खुशहाल शादी नहीं देखी। इसी वजह से उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने शादी की, तो कहीं वही कहानी दोबारा न दोहराई जाए। धीरे-धीरे यही डर उनके फैसलों का हिस्सा बन जाता है।
जब घर की तस्वीरें मन में बस जाती हैं – रवीना अरोड़ा ने अपनी पोस्ट में कहा कि बचपन में देखी गई बातें जल्दी नहीं भूलतीं। अगर किसी बच्चे ने अपने माता-पिता को शादी में कभी खुलकर खुश नहीं देखा, तो बड़ा होकर उसके मन में ये सवाल आने लगता है कि कहीं उसकी शादी भी ऐसी ही न हो जाए। यही सोच कई बार उसे शादी का फैसला लेने से रोक देती है। रवीना अरोड़ा की ये बात सोचने पर मजबूर करती है
हर युवा की कहानी एक जैसी नहीं होती – शादी से दूर रहने वाले हर युवा की वजह एक जैसी नहीं होती। कुछ लोग करियर पर ध्यान देना चाहते हैं। कुछ सही साथी मिलने का इंतजार करते हैं। वहीं कुछ लोग अपनी पसंद की जिंदगी जीना चाहते हैं। लेकिन बचपन में देखा गया घर का माहौल कई लोगों की सोच में लंबे समय तक जगह बनाए रख सकता है।
रिश्तों पर भरोसा फिर कैसे लौटे – शादी पर भरोसा लौटाने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि बुरे अनुभव हर रिश्ते की सच्चाई नहीं होते। अपने मन के डर को समझें और खुद पर किसी फैसले का दबाव न डालें। अच्छे और स्वस्थ रिश्तों को देखकर, समझकर और धीरे-धीरे अपनाकर शादी को लेकर सोच बदल सकती है। समय के साथ मन में बना डर कम हो सकता है और शादी पर भरोसा फिर से लौट सकता है।
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