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मोहम्‍मद यूनुस को सत्ता में लाने के लिए हुई थी सीक्रेट प्लानिंग, हसीना के सत्ता से हटने से पहले दिया गया था ऑफर


बांग्लादेश में शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने से पहले ही मोहम्मद यूनुस को सत्ता की बागडोर सौंपने की तैयारी कर ली गई थी। इसके लिए हसीना के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र नेताओं ने सीक्रेट तरीके से मोहम्मद तरीके से संपर्क किया था। मोहम्मद यूनुस के प्रेस सेक्रेटरी शफीकुल आलम ने यह दावा किया है। आलम ने कहा कि यह सब उस समय किया गया जब हसीना सत्ता में थीं और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी।
न्यूज एजेंसी के दफ्तर में हो रहा था सबकुछ – शफीकुल आलम ने एक फेसबुक पोस्ट में बताया कि 2024 में हसीना के खिलाफ आंदोलन कर रहे नेताओं और मोहम्मद यूनुस के बीच संपर्क के लिए पत्रकार कद्रुदीन शिशिर ने भूमिका निभाई थी। शिशिर उस समय ढाका में AFP की फैक्ट चेक टीम के संपादक थे। आलम ने बताया कि छात्र नेताओं को एक भरोसेमंद व्यक्ति की जरूरत थी जो उनके और मोहम्मद यूनुस के बीच पुल का काम कर सके। कद्रुद्दीन शिशिर ने यह जिम्मेदारी उठाई।
आलम ने बताया कि AFP के ढाका ब्यूरो में बैठकर ही शिशिर ने पूरी गोपनीयता के साथ इस संवेदनशील काम को अंजाम दिया था। आलम भी उस समय में AFP के ढाका ब्यूरो में थे। उन्होंने बताया कि उनके सामने कुछ दूरी पर बैठकर ही शिशिर ने मोहम्मद यूनुस से संपर्क किया और शुरुआती बातचीत कराने में मदद की।
बहुत कम और भरोसेमंद लोगों को ही पता था कि क्या चल रहा है। शिशिर ने ही छात्र नेताओं की ओर से 2006 के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता से संपर्क किया और दोनों पक्षों के बीच शुरुआती बातचीत कराई। शफीकुल आलम, मोहम्मद यूनुस के पूर्व प्रेस सेक्रेटरी
आलम ने बताया यह घटनाक्रम हसीना के सत्ता से हटने से 2 दिन पहले हुआ था। उन्होंने कहा कि हसीना की क्रूर सिक्योरिटी मशीनरी को इसकी भनक तक नहीं लगी। अगर उन्हें पता चल जाता कि क्या हो रहा है, तो शिशिर और हमारी पूरी AFP टीम शायद आइनाघर (एक गुप्त जेल) में पहुंच जाती।
हसीना सरकार का पतन – साल 2024 में छात्रों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद 5 अगस्त को बांग्लादेश की तत्कालीनी प्रधानमंत्री शेख हसीना को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी।
ये आंदोलन सरकारी नौकरियों में कोटा के खिलाफ शुरू हुए थे, जो देखते ही देखते हसीना को सत्ता से हटाने वाले आंदोलन में बदल गए।
जुलाई में आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया और पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों में हिंसक झड़पें हुईं। इसमें सैकड़ों लोग मारे गए।
बाद में आए विभिन्न आधिकारी और मानवाधिकार आंकड़ों में 1000 से 1400 लोगों के मारे जाने की बात कई गई थी।
आंदोलन इसके बाद भी बढ़ता रहा और 5 अगस्त 2025 को शेख हसीना ने कुर्सी छोड़ दी और भागकर भारत आ गईं। तब से वह भारत में ही रह रही हैं।
इसके तीन दिन बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया। इस सरकार पर देश में हिंसा को न रोकने के आरोप लगे।