
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने 33 वरिष्ठ अधिकारियों को निकाल दिया है। इनमें देश के कुछ सबसे ताकतवर सैन्य नेता भी शामिल हैं। हाल के दशकों में यह अनुशासनात्मक कार्रवाई के सबसे बड़े मामलों में से एक है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस साल होने वाली ’21वीं पार्टी कांग्रेस’ से पहले सत्ताधारी पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। साथ ही वह चौथे कार्यकाल के लिए तैयारी में जुटते दिख रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का वर्तमान (तीसरा) कार्यकाल वर्ष 2027 में पूरा होगा।
बीजिंग में कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति की चार दिवसीय बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में इन निष्कासनों की पुष्टि की गई। 26 से 29 अक्टूबर तक चली इस बैठक को 20वीं केंद्रीय समिति का पांचवां पूर्ण सत्र कहा जाता है। केंद्रीय समिति ने इन अधिकारियों के पार्टी अनुशासन के गंभीर उल्लंघन से जुड़ी रिपोर्टों की समीक्षा की थी।
निकाले गए लोगों में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के पूर्व उपाध्यक्ष झांग यूक्सिया, जॉइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के पूर्व प्रमुख लियू झेनली, शिनजियांग पार्टी के पूर्व प्रमुख मा जिंगरुई, पूर्व वरिष्ठ राजनयिक लियू जियानचाओ, पूर्व उद्योग मंत्री जिन जुआंगलोंग और सिक्योरिटीज रेगुलेटर के पूर्व प्रमुख यी हुइमान शामिल हैं। पार्टी का बयान
सैन्य नेतृत्व में बड़ा फेरबदल – निकाले गए 33 अधिकारियों में सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी झांग यूक्सिया और लियू झेनली शामिल हैं। बयान के अनुसार, हटाए गए लोगों में 16 सेना से जुड़े थे। बैठक में जनरल झांग शेंगमीन को पॉलिटिकल ब्यूरो में पदोन्नत भी किया गया, जो कम्युनिस्ट पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। झांग को सशस्त्र बलों पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की जिनपिंग की कोशिशों का अहम सहयोगी माना जाता है।
पिछले साल झांग को केंद्रीय सैन्य आयोग (CMC) का उपाध्यक्ष बनाया गया था। वे 2018 से इस साल जुलाई तक सेना के भ्रष्टाचार-रोधी प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। इस दौरान उन्होंने पीएलए (PLA) के भीतर कथित गड़बड़ियों को जड़ से खत्म करने के प्रयासों की देखरेख की। चीन के सशस्त्र बलों की देखरेख सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) करता है, जिसके प्रमुख शी जिनपिंग हैं।
शी के तीसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी कार्रवाई – आंकड़ों के अनुसार, शी के तीसरे कार्यकाल के दौरान सेंट्रल कमिटी से हटाए गए सदस्यों की कुल संख्या 51 हो गई है। उनके पहले कार्यकाल में 35 और दूसरे कार्यकाल में 5 सदस्यों को हटाया गया था। यह कार्रवाई केवल पार्टी के शीर्ष पदों तक सीमित नहीं है। चीन की भ्रष्टाचार-रोधी निगरानी संस्था के अनुसार, इस साल के पहले नौ महीनों में पार्टी के भीतर 680,000 लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
पार्टी ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद शी की ओर से शुरू किए गए अभियान को इसका श्रेय दिया है। इस अभियान ने ढीले-ढाले शासन को सुधारा और पार्टी, सरकार और सेना के भीतर मौजूद गंभीर खतरों को खत्म किया। इस पूर्ण सत्र (प्लेनम) में केंद्रीय समिति के 279 सदस्य उपस्थित थे। शी जिनपिंग के 14 साल के कार्यकाल में यह पहली बार है जब ऐसी बैठक में उपस्थिति 300 से कम रही है।
क्या कह रहे हैं विश्लेषक – इस मामले पर लियू ने कहा, ‘राजनीति विज्ञान में एक प्रसिद्ध तर्क है, जिसे योग्यता-निष्ठा का आदान-प्रदान कहा जाता है। इसका मूल रूप से मतलब यह है कि आप किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं रख सकते जो बहुत सक्षम हो लेकिन आपके प्रति बहुत वफादार भी हो।
हिलमैन का कहना है कि कठोर अनुशासन से सतही अनुपालन हो सकता है, जैसे कि बैठकें, कार्यशालाएं और प्रशिक्षण सत्र आयोजित करना, ताकि वास्तव में कुछ किए बिना वफादारी प्रदर्शित की जा सके।
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