
अगले 50 साल की प्लानिंग करके चला है सिंगापुर, वाहन इतने महंगे कि आप खरीद ही न पाओ। इसके पीछे मकसद कि लोग ज्यादा से ज्यादा पैदल चलें। सेहदमंद रहें। यही कारण है कि सिंगापुर में बढ़ी तोंद वाले लोग कम ही दिखेंगे। पर्यटकों को हर तरह के मनोरंजन यहां उपलब्ध हैं। कुछ जीवंत एडवैंचर ऐसे कि आपको वास्तविक सा लगने लगता है सब। साहसिक गतिविधियां भी कमाल हैं। कोलकाता निवासी सिवेंदू दास की बंजी जंपिंग देख सब पता चला कि रोमांच की दीवानी दुनिया यहां क्या-क्या कर सकती है, वहीं 75 साल के दिनकर रायकर कि वो उड़ान भी नहीं भूल सकता जो उन्होंने युवाओं की तरह भरी। दरअसल यहां हर शख्स जिंदगी जीता है। मैंने शायद ही किसी चेहरे पर तनाव या थकान देखी हो। यही यहां की सरकार का मकसद है। कहते हैं कि डर है तो अनुशासन है। यही बजह है कि सिंगापुर की सड़कें भी ऐसी साफ और सुंदर हैं कि जैसे घर के अंदर का माहौल हो। यानी यहां का हर नागरिक सिंगापुर को आगे ले जाने में अपना योगदान देना चाहता है।
दुनिया को दिखाना चाहते हैं
अपना परिचय देना। बिजटिंग कार्ड देना व लेना यहां आम है। ऐसा कर पूरे संसार से जुडऩा चाहते हैं यहां के लोग। मैंने बहुत से लोग देखे जो अक्सर पर्यटकों से पूछते ही हैं कि आपको कैसा लगा सिंगापुर। बच्चों से लेकर बड़ों तक यहां सब कुछ है। ईमानदार सोच और ईमानदारी किसी भी देश को कहां से कहां ले जा सकती है, वे सिंगापुर को देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है।
किसी एक देश पर निर्भर नहीं
खेती के लिए जगह नहीं। हर चीज बाहरी देशों से मंगवाई जाती है। फिर भी सिंगापुर एक देश पर निर्भर नहीं। कभी किसी देश से तो कभी वही चीज किसी देश से ताकि किसी एक देश के आगे उसे गिड़गिड़ाना न पड़े। अर्थव्यवस्था में आगे बढऩे का मंत्र कोई सिंगापुर से सीखे। किसी तरह के विवाद में न पड़कर हमेशा आगे बढऩा चाहता है सिंगापुर।
शाम को सड़कें बंद, उत्सव का माहौल
शाम के समय शहर के कुछ क्षेत्रों की सड़कें बाधित हो जाती हैं। उस दौरान बड़े-बड़े होटलों की कुर्सियां, मेज सड़क पर आ जाते हैं और फिर शुरू होता है मनोरंजन का दौर। सिंगापुर हर वक्त और हर समय सैलानियों के स्वागत को तैयार रहता है। समुद्र के बीच होने के कारण अपने संसाधनों का इस्तेमाल कर सिंगापुर ने लाजवाब प्रबंधन किया है।
मुस्तफा मार्कीट
यहां की मशहूर मार्कीट है मुस्तफा मार्कीट। लिटिल इंडिया आर्केड। जी हां बिल्कुल ठीक सोच रहे आप। यहां आते ही आपको इंडिया की फीलिंग आती है। भारत में मिलने वाला हर सामान व खाना यहां मिलेगा। यहां ज्यादातर साऊथ इंडियन लोग दिखेंगे। मुस्तफा किसी समय में यहां छोटा सा खोखानुमा दुकान चलाता था और अपनी मेहनत के दम पर एक जबरदस्त सम्राज्य स्थापित कर चुका है मुस्तफा। शॉपिंग माल, खाने सब कुछ। आज अकेला मुस्तफा यहां सैंकड़ों लोगों को रोजगार दिए हुए है।
सिंगापुर फ्लायर
सिंगापुर फ्लायर में 28 बोगियां हैं और एक समय में 28 लोगों को एक बोगी में ले जाया जा सकता है। फ्लायर केवल उस समय रुकता है जब किसी हैंडीकैप या फिर गर्भवती लेडी को इसमें चढऩा होता है वरना लगातार घूमता रहता है। सबसे ऊंचाई पर पहुंचने पर आपका सारा शहर दिखता है। यही नहीं यहां से मलेशिया भी दिखने लगता है।
न अपराध न दुर्घटनाएं
यह कानून की सख्ती मान लो या फिर सिंगापुर वासियों का अनुशासन, यहां दुर्घटनाएं न के बराबर ही होती हैं। कोई घोर लापरवाही ही ऐसा करवा सकती है। न कोई हड़बड़ी और न ही कोई गड़बड़ी। सब्र से चलते हैं यहां वाहन और लोग भी।
न कुत्ते दिखते हैं और न पशु
कुछ दिन के प्रवास में हमने सिर्फ एक पालतू कुत्ता देखा। जिज्ञासा स्वरूप जब अपने गाइड सोहेल से पूछा तो उन्होंने बताया कि यहां कुत्तों के पालने के लिए सरकार से इजाजत लेनी पड़ती है। यानी प्रशासन के लोग आपके घर आकर देखेंगे कि आपका घर कुत्ता रखने योग्य है भी कि नहीं। यानी स्पेस बगैरा देखा जाता है ताकि कुत्ते को परेशानी न हो। अगर फिर भी इजाजत मिल जाए तो आगे की कुछ और सख्त शर्तों को मानना पड़ता है।
जनवरों के लिए फ्लाईओवर
सिंगापुर जू की तरफ जाते वक्त हाईवे पर एक फ्लाईओवर दिखेगा। यह फ्लाईओवर केवल जानवरों को आर-पार करने के लिए है। इस पर आदमी नहीं जा सकते। दरअसल ऐसा इसलिए किया गया है ताकि जानवर दोनों और फैले जंगल से निकल कर सड़क पर न आएं और फ्लाईओवर का प्रयोग करें।
सिंगापुर की सुप्रीम कोर्ट के जज भारतीय
हमें बताया गया कि यहां लेबर भारत, बंगलादेश और पाकिस्तान से ही ज्यादातर होती है। लेकिन इतना सब जानने के बाद जब हमें बताया गया कि सिंगापुर की सुप्रीम कोर्ट के जज एक भारतीय हैं तो सीना गर्व से चौड़ा हो गया। भारत ने अपनी कामयाबी के झंडे हर तरफ गाड़े हैं। अकेले भारत से ही यहां हर माह 20 लाख लोग घूमने आते हैं।
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