
रूस और क्रीमिया को अलग करने वाले केर्च जलडमरूमध्य के पास दो पोतों में आग लगने की घटना में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई। दोनों पोतों में भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। क्रीमिया प्रधानमंत्री सर्गेई अक्स्योनोव ने मंगलवार को यह बात कही। रूस की समाचार एजेंसी तास के अनुसार, “प्राथमिक सूचना बताती है कि सोमवार रात दोनों पोत कैंडी और मेस्ट्रो में तेल स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन पंप के विफल होने की वजह से आग लगी। यह प्रक्रिया सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर की जा रही थी।”
दोनों जहाजों पर कुल 32 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें कुछ तुर्की और भारतीय थे। समाचार एजेंसी का कहना है कि कैंडी में चालक दल के 17 सदस्य थे, जिनमें आठ भारतीय व नौ तुर्की के नागरिक थे, जबकि मेस्ट्रो में सात भारतीय, सात तुर्की और लीबिया का एक प्रशिक्षु सवार था।
समुद्री व नदी यातायात के लिए रूसी फेडरल एजेंसी के प्रवक्ता ने मंगलवार को समाचार एजेंसी तास को बताया कि अब तक 14 शव बरामद किए गए हैं और 12 लोगों को बचाया जा चुका है और अब अन्य किसी के भी बचने की संभावना नहीं है।
प्रवक्ता ने कहा, “सुबह छह बजे, अभियान की स्थिति को बचाव से तलाश में वर्गीकृत किया गया क्योंकि किसी के भी बचने की उम्मीद नहीं है।” उन्होंने कहा, “पोत में आग लगातार भड़क रही है। इसे तब तक नहीं बुझाया जा सकता, जबतक पूरी गैस जल नहीं जाएगी।” उन्होंने कहा, “बचाए गए नाविकों को खराब मौसम की वजह से अभी तक किनारे पर नहीं लाया जा सका है।” घटना में मारे गए लोगों की पहचान अभी तक नहीं हुई है।
आरटी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पोतों पर तंजानिया का झंडा फहरा रहा था। एक में द्रवीकृत प्राकृतिक गैस था और दूसरा एक टैंकर था। क्रीमियाई बंदरगाह के निदेशक ने कहा कि दुर्घटना से समुद्री आवागमन में व्यवधान उत्पन्न नहीं हुआ है और केर्च जलडमरूमध्य के रास्ते पोतों का आना-जाना जारी है।
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