
कुछ लोगों को बार-बार पेशाब आने की समस्या होती है, जिसकी वजह से वह रात को ठीक से सो नहीं पाते। दिनभर में 5-6 बार पेशाब आना नार्मल है लेकिन जब यह 8-10 बार हो जाए तो ध्यान देने की जरूरत होती है। यह यूटीआई या डायबिटीज जैसी बीमारियों का संकेत भी हो सकता है।
दरअसल, कई बार यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन या डायबिटीज के कारण भी लोगों को बार-बार यूरिन आने की दिक्कत होती है। ऐसे में यहां हम आपको कुछ लक्षण बताएंगे, जिससे आप पता लगा सकते हैं कि यूटीआई के शिकार है या धीरे-धीरे शुगर की चपेट में जा रहे हैं…
यूटीआई के कारण होने वाला यूरिन
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन में बैक्टीरिया किडनी व ब्लेडर को नुकसान पहुंती है, जो किडनी को ब्लैड से जोड़ने वाली ट्यूब्स में भी फैल जाता है। इसकी वजह से ब्लेडर में सूजन आ जाती है और वो यूरिन को इक्ट्ठा नहीं कर पाता। ऐसे में जब किडनी लिक्विड को फिल्टर करती है तो यूरिन आने लगता है।
यूरिन का रंग कैसा है?
ब्लेडर व किडनी में इंफेक्शन होने पर यूरिन कम मात्रा में, धुंधला या हल्का लाल रंग का आ सकता है। कई बार यूरिन के साथ खून व तेज स्मेल भी आती है। इससे व्यक्ति को फीवर, ठंड लगना, नोजिया, साइड पेन या पेट के निचले हिस्से में हल्के दर्द की शिकायत हो सकती है।
डायबिटीज के कारण होने वाला यूरिन
डायबिटीज टाइप-1 या टाइप-2 में यूरिन की मात्रा व फ्रिक्वेंसी अधिक होती है क्योंकि डायबिटीज के कारण ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। ब्लड में बढ़ी हुई शुगर की मात्रा को किडनी फिल्टर करने की कोशिश करती है। मगर, ऐसा हमेशा नहीं होती और एक समय बाद शुगर लगातार यूरिन के साथ शरीर से बाहर निकलने लगती है, जिससे बार-बार यूरिन जाना पढ़ता है।
बार-बार यूरिन आने के अन्य कारण
इसके अलावा यूरिन इंफैक्शन, बढ़ती उम्र, हॉर्मोंस में बदलाव, प्रोस्ट्रेट ट्यूब पर दबाव पड़ना, स्लीप एपनिया, तनाव, प्रेगनेंसी, हाई ब्लड प्रेशर और इंटररिस्टशियल सिस्टाइटिस के कारण भी यह समस्या हो सकती है। रात को सोने से पहले कैफीन का सेवन भी बार-बार पेशाब आने का कारण बन सकता है।
यूरिन का रंग कैसा है?
डायबिटीज होने पर यूरिन झागदार, गहरे पीले रंग व तेज स्मेल वाला आ सकता है। इसके साथ ही अधिक प्यास लगना, भूख लगना, थकावट, वजन कम होना, घाव जल्दी ना भरना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।
झागदार पेशाब
. प्रोटीन का अधिक सेवन करने की वजह से भी यूरिन झागदार आ सकता है।
. ब्लैडर इंफ्लेमेशन, ओवरएक्टिव ब्लैडर और प्रोस्टेट बढ़ना का संकेत
– डिहाइड्रेशन, यूरिनरी ट्रेक में संक्रमण या ब्लॉकेज, दवाओं का असर और किडनी रोग आदि के कारण पेशाब कम आने की समस्या हो सकती है।
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