Friday , June 19 2026 3:42 AM
Home / News / भारत, दक्षिणपूर्व एशिया को चीन से खतरा, इसलिए US यूरोप से हटा रहा सेना: माइक पॉम्पिओ

भारत, दक्षिणपूर्व एशिया को चीन से खतरा, इसलिए US यूरोप से हटा रहा सेना: माइक पॉम्पिओ


एक ओर चीन ने भारत में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास तनावपूर्ण स्थिति को हवा दे रखी है, तो दूसरी ओर साउथ चाइना सी में भी आक्रामक रवैया अपना रहा है। कोरोना वायरस को लेकर भी दुनिया के सामने कड़े तेवर अपना रहा है। चीन की हालिया गतिविधियों के देखते हुए अमेरिका ने उसे इतना बड़ा खतरा करार दिया है कि यूरोप से अपनी सेना हटाकर एशिया में तैनात करनी शुरू कर दी है।
चीन के विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ ने चीन को भारत और दक्षिणपूर्व एशिया के लिए खतरा बताया है और कहा है कि उसकी वजह से अमेरिका ने यूरोप में अपनी सेना घटानी शुरू कर दी है। पॉम्पिओ से सवाल किया गया था कि जर्मनी में अमेरिकी सेना की टुकड़ी को क्यों घटा दिया गया। माइक ने कहा कि वहां से हटाकर सेना को दूसरी जगह तैनात किया जा रहा है।
थिओडोर, निमित्ज ने किया अभ्यास
अमेरिका के USS थिओडोर रूजवेल्ट और USS निमित्ज स्ट्राइक ग्रुप्स ने इंटरनैशनल वॉटर पर ऑपरेशन शुरू किया और करीब से दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स के ऑपरेट करने की क्षमता का प्रदर्शन किया। वहीं, एक और कैरियर स्ट्राइक ग्रुप USS रॉनल्ड रीगन फिलिपीन सी में तैनात था। पश्चिम फिलिपीन सी साउथ चाइना सी में आता है जिसे लेकर चीन और अमेरिका आमने-सामने हैं। फिलिपीन सी फिलिपीन के पूर्वी तट, ताइवान, जापान से लेकर मारियाना टापू में गुआम और कैरोलाइन टापू में पलाऊ तक फैला है।
चीन की अमेरिका को चेतावनी
गौरतलब है कि चीन ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि जापान जैसे देशों में अपनी सैन्य तैनाती न करे। चीन ने यहां तक दावा किया है कि अगर अमेरिका इस दिशा में आगे बढ़ता है तो चीन भी हर जवाब के लिए तैयार रहेगा। दरअसल, हाल ही में जापान और अमेरिका ने साउथ चाइना सी में संयुक्त ड्रिल भी की है। हालांकि, जापान अमेरिका के ऐंटी-मिसाइल सिस्टम को तैनात करने से फिलहाल रोक चुका है।
ट्रंप के कार्यकाल में बढ़ी सक्रियता
खास बात यह है कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में फ्रीडम ऑफ नैविगेशन के लिए सिर्फ 4 बार अमेरिका ने ऑपरेशन्स किए लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से 22 बार ऐसा किया जा चुका है। रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि दोनों देशों की सेनाओं को संवाद बढ़ाना चाहिए ताकि गलतफहमी से बचा जा सके। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि सैन्य संबंध खराब होने से खतरानक घटना, विवाद या संकट की आशंका बढ़ सकती है।
जापान ने रोकी थी Aegis Ashore की तैनाती
बता दें कि जापान ने कुछ दिन पहले ही अमेरिका के अरबों डॉलर के मिसाइल डिफेंस सिस्टम Aegis Ashore को नहीं लेने का फैसला किया था। रक्षा मंत्री तारो कोनो ने बताया था कि उसके डिजाइन को सही करने की जरूरत थी क्योंकि रॉकेट के मलबे से आसपास के लोगों को खतरा हो सकता था। यह काम काफी महंगा, बड़ा और गैरजरूरी समझकर Aegis का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया गया। जापान के अकीता और यमागुची में तैनात किए जाने वाले Aegis की मदद से बैलिस्टिक मिसाइल्स पर नजर रखी जा सकती थी।
‘कम्युनिस्ट पार्टी है खतरा’
माइक ने कहा, ‘चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के ऐक्शन से लग रहा है कि वह भारत, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपीन और साउथ चाइना सी में खतरा है। अमेरिकी सेना को हमारे वक्त की इन चुनौतियों से निपटने के लिए सही तरीके से तैनात किया गया है।’ पॉम्पिओ ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने दो साल में अमेरिकी मिलिट्री की तैनाती की रणनीतिगत तरीके से समीक्षा की है। अमेरिका ने खतरों को देखा है और समझा है कि साइबर, इंटेलिजेंस और मिलिट्री जैसे संसाधनों को कैसे बांटा जाए।

‘पूरी दुनिया कर रही है चीन का सामना’
इससे पहले पॉम्पिओ ने बताया था कि उन्होंने यूरोपियन यूनियन के विदेश नीति चीफ जोसेप बोरेल के चीन को लेकर बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार किया है और इसके लिए वह जल्द ही यूरोप जाएंगे। पॉम्पिओ ने कहा कि यह अमेरिका नहीं है जो चीन का सामना कर रहा है, पूरी दुनिया चीन का सामना कर रही है। पॉम्पिओ ने कहा है, ‘मैंने इस महीने यूरोपियन यूनियन के विदेश मंत्रियों से बात की और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बारे में बहुत सा फीडबैक मिला, कई तथ्य सामने आए जिनमें पीपल्स लिबरेशन आर्मी के उकसावे वाले ऐक्शन्स की बात थी। इसमें साउथ चाइना सी में उसकी आक्रामता, भारत के साथ घातक झड़प और शांतिपूर्ण पड़ोसियों के खिलाफ खतरे का जिक्र था।’