
पिछले साल पेरू के ला लिबर्टाड क्षेत्र में स्थानीय किसानों को एक प्राचीन धार्मिक स्थल के अवशेष मिले जिन पर एक बड़ा सा म्यूरल (दीवार पर बनी पेंटिंग) थी। रिसर्चर्स ने अब पता लगाया है कि यह पेंटिंग 3200 साल पुरानी है और इसमें मकड़े-देवता चाकू पकड़े हुए दिख रहे हैं। गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक अनजाने में इस जगह का 60% हिस्सा किसानों के उपकरणों से खराब हो गया। अब इस स्थल को सुरक्षित करने की इजाजत दे दी गई है।
अगूस्टो एन वीज फाउंडेशन के पुरातत्व निदेशक रेग्युलो फ्रैंको जॉर्डन ने कहा कि इसे क्यूपिस्नीक सभ्यता में बनाया गया होगा और नदी के पास होने से माना जा रहा है कि जल के देवताओं की पूजा की जाती होगी। उन्होंने पेरू के अखबार ला रिपब्लिका से बताया है कि यहां हजारों साल पहले समारोह आयोजित किए जाते होंगे। यहां बने मकड़े का संबंध जल से है और यह पुरातन सभ्यता में अहम जीव था।
मिस्र में आगामी 3 अप्रैल को एक रॉयल परेड आयोजित की जाएगी और कई प्राचीन ममी को तहरीर स्क्वायर पर स्थित नैशनल म्यूजियम से काहिरा में स्थित नैशनल म्यूजियम में भेजा जाएगा। इन ममियों में राजा रामसेस द्वितीय, सेती प्रथम, रानी हटशेपसूट आदि शामिल हैं। मिस्र सरकार का कहना है कि काहिरा के म्यूजियम में सारी ममी को एक साथ रखने से पर्यटक उन्हें एक ही जगह देख सकते हैं। साथ ही पैसे के संकट से जूझ रही सरकार को उम्मीद है कि पर्यटक बड़ पैमाने पर आएंगे और इससे कोरोना काल में उसकी आय में वृद्धि होगी। उधर, मिस्र में लगातार हो रहे हादसों के बीच ट्विटर पर दावा किया जा रहा है कि इन घटनाओं के पीछे राजा फराओ का श्राप लगा है। उनका कहना है कि मिस्र के ममी के शाही परेड से ठीक पहले इतनी घटनाओं ने कई सवाल पैदा कर दिए हैं। साद अबेदीन लिखते हैं, ‘इन सबको देखने के बाद लगता है कि फराओ का श्राप वास्तविक है।’
डेली मेल के मुताबिक इस प्राचीन श्राप में कहा गया था कि जो व्यक्ति राजा फराओ की शांति में खलल डालेगा, उसके पास मौत बहुत तेजी से आएगी। ट्विटर यूजर फ्रेडी बेंजामिन कहते हैं, ‘फिरौन के श्राप या ममी के श्राप में कहा गया है कि यह उसे लगेगा जो प्राचीन मिस्र के ममियों खासतौर पर फिरौन की ममी की शांति को भंग करेगा। यह श्राप चोरों और पुरातत्वविदों में कोई भेद नहीं करता है और दावा किया जाता है कि इससे लोगों का भाग्य बिगड़ जाता है, उन्हें बीमारी होती है या उनकी मौत हो जाती है।’ शरीफ अहमद ने लिखा कि मिस्र के प्रसिद्ध देवता होरुस ने कहा था कि उन्होंने मिस्र के राजाओं और रानियों की आत्मा से संपर्क किया है और उन्होंने आश्वासन दिया है कि यह उनका काम नहीं है। इन घटनाओं के पीछे उन देशों और समूहों का हाथ है जो मिस्र से घृणा करते हैं। इस तरह ट्विटर पर मिस्र के श्राप को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं।
इस बीच पुरातत्वविदों ने ट्विटर पर चल रहे दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि मिस्र में हो रही इस तरह की घटनाएं केवल एक संयोग मात्र हैं। मिस्र के पूर्व मंत्री अल नाहर ने कहा कि ममी के एक जगह से दूसरी जगह भेजे जाने का इन हादसों से कोई संबंध नहीं है। चर्चित पुरातत्वविदों ने श्राप के दावे को आधारहीन बताया है और कहा कि इन ममी को दूसरी जगह भेजे जाने से उनका सम्मान ही बढ़ेगा। बता दें कि फिरौन मिस्र का सबसे ताकतवर बादशाह था, जिसने 16वीं शताब्दी ईसा पूर्व में शासन किया था। कहा जाता है कि विदेशी आक्रमणकारी हक्सोस राजवंश के साथ लड़ाई में पकड़े जाने के बाद फिरौन को मौत के घाट उतार दिया गया था। तब से फिरौन को ममी बनाकर थेब्स में नेक्रोपोलिस के भीतर दफना दिया गया था। इस ममी की खोज 1881 में की गई थी। तब यह पता नहीं चल सका था कि उनके शरीर पर कई जानलेवा चोट के निशान थे। अब जब उनके सिर का सीटी स्कैन किया गया है तो वैज्ञानिकों को कई गंभीर घाव के निशान दिखाई दिए हैं।
राजा फिरौन की मौत एक बार फिर से विवादों में घिर गई है। वैज्ञानिकों का दावा है कि फिरौन के सिर पर लगी चोटों को जानबूझकर छिपाया गया था। यह भी पता लगा है कि मरने के समय फिरौन के हाथ को उनकी पीठ के पीछे करके बांधा गया था। इस रिसर्च टीम के प्रमुख काहिरा यूनिवर्सिटी के सलारामोलॉजिस्ट सहर सलीम ने कहा कि इससे पता चलता है कि फिरौन वास्तव में मिस्र को आजाद कराने के लिए अपने सैनिकों के साथ अग्रिम पंक्ति में थे। शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाया है कि फिरौन को कई अलग-अलग हथियारों के जरिए एक से ज्यादा हमलावरों ने मारा था। क्योंकि, उनके शरीर पर पांच अलग-अलग तरह के हथियारों से बने चोट के निशान मिले हैं। दावा किया गया है कि अगर एक हमलावर ने मारा होता तो वह अलग-अलग ऐंगल से एक ही हथियार का प्रयोग किया होता, लेकिन इसमें चोट के निशान बताते हैं कि हथियार एक से ज्यादा थे।
हो सकता है कि जनवरी से मार्च के बीच जब बारिश होती थी तो यहां विशेष समारोह आयोजित किया जाता होगा। लीमा के म्यूजियो लार्को म्यूजियम के मुताबिक इस सभ्यता में इलाके के सबसे पहले मंदिरों का निर्माण किया गया था और जानवरों, फलों, इंसानी सिरों और घरों के आकार में बर्तन बनाए जाते थे। कुछ पर मकड़े दिखते हैं जिन्हें बारिश, कृषि और बलि से जुड़े हैं। इस कॉम्प्लेक्स की रिसर्च से जुड़े पुरातत्व फेरेन कासिलो ने बताया है कि इसमें कोन के साथ दीवारें हैं।
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