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इजरायल चुनाव में नेतन्याहू को झटका, सबसे आगे पर बहुमत से दूर, मुस्लिम पार्टियां बनेंगी किंगमेकर या फिर चुनाव?


इजरायल में हो रही मतगणना में साफ हो गया है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्या्हू के पास अब सरकार चलाने के लिए बहुमत नहीं रहा। इजरायल में 85 फीसदी से ज्यादा वोटों की गिनती हो चुकी है और नेतन्याहू का गुट और उनका विरोधी गुट, दोनों जरूरी बहुमत से काफी दूर हैं। हालांकि, नेतन्याहू का गठबंधन 53 सीटों के साथ अभी सबसे आगे चल रहा है।
इजरायल में सरकार बनाने का क्या है समीकरण? – 120 सदस्यों वाली इजरायली नेसेट (संसद) में सरकार बनाने के लिए 61 सीट की जरूरत होती है।
इजरायल में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी वाले गुट को 53 सीटें मिलने की संभावना है।
गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाला विरोधी यहूदी गुट 48 सीटें जीत सकता है।
इस चुनाव में अरब पार्टियों को भारी समर्थन मिला है और वे 19 सीटों पर बढ़त में हैं। यह एक ऐतिहासिक आंकड़ा है।
हालांकि, अभी फाइनल नतीजे आने बाकी हैं, जबकि सैनिकों और अनुपस्थित वोटों की गिनती होनी बाकी है। यह कुल वोटर का 14 फीसदी है।
इजरायल में त्रिशंकु संसद – इस नतीजे के साथ यह साफ है कि इजरायल एक त्रिशंकु संसद की तरफ बढ़ चला है। अब नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि क्या विपक्षी पार्टियां अरब पार्टियों के साथ गठबंधन को तैयार होती हैं या नहीं। हालांकि, विपक्षी यशार पार्टी के नेता गादी आइसेनकोट ने ऐसे किसी गठबंधन की संभावना को खारिज कर दिया।
ऐसे में रिटायर्ड जनरल आइसेनकोट और उनके सहयोगियों के सामने दो ही रास्ते हैं। वे अरब पार्टियों- जॉइंट लिस्ट और राआम- के साथ साथ समझौता करें या नेतन्याहू के साथ मिली-जुली सरकार का गठन करें। अगर ऐसा नहीं होता तो इजरायल को एक बार फिर चुनाव के लिए तैयार होना होगा।
इजरायल में अब आगे क्या? – इजरायल के इतिहास में अब तक कोई भी दल अकेले बहुमत हासिल नहीं कर पाया है।
इजरायल में हमेशा दो या उसके अधिक दल मिलकर सरकार बनाते रहे हैं। ऐसे में गठबंधन सरकार इजरायली लोगों के लिए नया कॉन्सेप्ट नहीं है।
केंद्रीय चुनाव समिति से नतीजे जारी होने के बाद इजरायली राष्ट्रपति राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से संपर्क स्थापित करते हैं।
राजनीतिक दलों से बातचीत के बाद राष्ट्रपति किसी एक पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए 28 दिन का समय देंगे।
अगर वह नेता सरकार बनाने में असफल हो जाता है तो उसके प्रतिद्वंद्वी को मौका दिया जाएगा।
जब तक नया बहुमत नहीं बन जाता, तब तक नेतन्याहू केयरटेकर प्रधानमंत्री के रूप में पद पर रहेंगे।
जब इजरायल में 3 साल में हुए 5 चुनाव – इजरायल में 2019 से 2023 के बीच 5 चुनाव कराने पड़े थे। अप्रैल 2019 में संसद के लिए हुए चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं मिला। चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए की गई कोई भी कोशिश रंग नहीं लाई और उसी साल सितम्बर में दोबारा चुनाव कराए गए। लेकिन इस बार भी किसी दल को बहुमत नहीं मिल पाया।