
यूक्रेन पर हमले को लेकर (Russia Ukraine War) अमेरिका समेत नाटो देशों ने रूस पर प्रतिबंधों की बौछार (Sanctions Against Russia) की हुई है। इस बीच खुलासा हुआ है कि रूस ने प्रतिबंधों के बावजूद फ्रांस, जर्मनी और इटली से 2258 करोड़ रुपये के हथियार (France Germany Sell weapons to Russia) खरीदे हैं। आशंका जताई जा रही है कि इन हथियारों का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ किया गया है। हथियारों की यह डील 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया पर रूस के कब्जे के बाद अंजाम दी गई थी। तब यूरोपीय यूनियन ने अपने सदस्य देशों से रूस के हथियारों की खरीद-बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया था। लेकिन, इन दोनों देशों ने प्रतिबंधों में लूपहोल खोजकर रूस के साथ करोड़ों रुपयों की यह डील फाइनल की थी।
नाटो के सदस्य होने के बावजूद रूस को बेचे हथियार : फ्रांस, जर्मनी और इटली तीनों नाटो के सक्रिय सदस्य हैं। इन तीनों देशों ने यूक्रेन को लेकर हमेशा रूस की आलोचना की है। यहां तक कि वर्तमान संघर्ष में भी रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को लेकर यूरोपीय यूनियन की बैठक में तीनों देशों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। इसके बावजूद अपने दुश्मन देश रूस को हथियार बेचने के खुलासे से पूरे यूरोप में बवाल मचा हुआ है। रूस के साथ हथियारों की डील का खुलासा पिछले महीने ही किया गया था।
फ्रांस और जर्मनी ने बेचें करोड़ों के हथियार : द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में से तीन ने रूस को मिसाइलों, रॉकेटों, बंदूकों और बमों सहित कई सैन्य उपकरणों का निर्यात किया था। इन हथियारों की अनुमानित कीमत 2258 करोड़ रुपये से ज्यादा थी। इनमें से कुल 78 फीसदी अकेले फ्रांस ने निर्यात किया था। जर्मन फर्मों ने भी रूस को कई तरह के सैन्य हार्डवेयर, हथियारों के स्पेयर पार्ट्स और साजोसामान की आपूर्ति की थी।
ईयू के प्रतिबंधों में कमजोरी खोजकर की थी डील : यूक्रेन के क्रीमिया पर रूस के कब्जे के बाद यूरोपीय संघ ने आठ साल पहले हथियार और गोला-बारूद, सैन्य वाहन और उपकरण, अर्धसैनिक उपकरण और स्पेयर पार्ट्स सहित सभी प्रकार की हथियारों और उससे संबंधित सामग्री की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बिक्री, आपूर्ति, हस्तांतरण या निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, इनमें 1 अगस्त 2014 से पहले साइन की गई डील को पूरा करने की अनुमति दी गई थी। बस, यूरोपीय यूनियन के इन देशों ने प्रतिबंधों में मिली इसी छूट का फायदा उठाया। उन्होंने डील के अंदर डील को जोड़कर रूस को हथियार और गोला-बारूद बेचे।
यूक्रेन पर हमले के बाद भी यूरोपीय संघ ने रूस को दिए खरबों डॉलर : इस महीने की शुरुआत में पता चला था कि यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद से यूरोपीय संघ ने रूस को ऊर्जा के लिए हर दिन लगभग 1 बिलियन यूरो का भुगतान किया था। जर्मनी ने रूस के साथ संबंधों के कारण शुरुआत में यूक्रेन को हथियार देने से इनकार किया था। लेकिन अमेरिका और बाकी देशों के विरोध के कारण बर्लिन ने कुछ हथियार जरूर भेजे। इस कारण जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज को अपने ही देश में आलोचना का सामना करना पड़ा था।
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