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एलन मस्क के सैटेलाइट इंटरनेट की नई कीमत, Rs. 2500 से 3500 मंथली रिचार्ज में लॉन्च हो सकता है स्टारलिंक


स्टारलिंक की सैटेलाइट सर्विस के लिए रिटेल ग्राहकों को हर महीने 2500-3500 रुपये देने पड़ सकते हैं। लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। हाल ही में कंपनी के प्लान की कीमत का खुलासा हुआ था। हालांकि, उसे स्टारलिंक ने तकनीकी गड़बड़ी बोलकर कुछ ही समय में हटा दिया था।
Elon Musk की कंपनी स्टारलिंक भारत में जल्द अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस लॉन्च करने वाली है। लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, रिटेल ग्राहकों के लिए इसकी कीमत 2,500 से 3,500 रुपये प्रति माह के बीच हो सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हाल ही में कंपनी के सैटेलाइट इंटरनेट प्लान की कीमत का खुलासा हुआ था। इसके लिए एक वेबसाइट लाइव की गई थी, जिससे स्टारलिंक सर्विस के प्लान की जानकारी सामने आई थी। इसके अनुसार, भारत में स्टारलिंक के सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस के प्लान की कीमत 8600 रुपये होगी। हालांकि, कुछ घंटों के बाद ही वेबसाइट और इस जानकारी को हटा दिया गया। कंपनी ने बाद में इसे एक तकनीकी गड़बड़ी बताया था।
हर महीने देने पड़ सकते हैं 2500-3500 रुपये – ET की रिपोर्ट (Ref.) के अनुसार, स्टारलिंक भारत में रिटेल कस्टमर्स के लिए 2500-3500 रुपये प्रति माह में अपनी सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस लॉन्च करने पर विचार कर रही है। एलन मस्क की यह कंपनी मैरीटाइम, एविएशन, रिटेल और एंटरप्राइज जैसी इंडस्ट्रीज में कई तरह की सर्विस देने की तैयारी में है।
अभी कंपनी का उद्देश्य पैसे कमाना नहीं -SpaceX ने कीमतों और भारत में नियुक्तियों के बारे में पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। एक एनालिस्ट के अनुसार, स्टारलिंक भारतीय बाजार में एंट्री कर रही है। अभी उसका उद्देश्य पैसा कमाना नहीं बल्कि अपनी जगह बनाना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जब सैटेलाइट का जाल और घना होगा, तो उनकी प्रति यूनिट लागत बेहतर होगी। वे भारत में एक लंबी अवधि की योजना के साथ आ रहे हैं।
8600 रुपये का प्लान विशेषज्ञों को लगा महंगा – कंपनी की वेबसाइट पर दिखाया गया 8600 रुपये का प्लान इंडस्ट्री के विशेषज्ञों को बहुत महंगा लगा। उनका मानना ​​था कि इतनी महंगी सेवा भारत जैसे अन्य मार्केट में सफल नहीं हो पाएगी। उन्होंने कहा कि स्टारलिंक सभी नियामक मंजूरी और दूरसंचार विभाग (DoT) से स्पेक्ट्रम पाने करने के बाद सही समय पर अपनी कीमतों की घोषणा करेगी।
कंपनी को पहले ही मिल चुके लाइसेंस – आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिटेल ग्राहकों को सैटेलाइट सर्विस देने के लिए कंपनी पहले ही जरूरी ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) लाइसेंस पा चुकी है। इसके अलावा, कंपनी ने वीएसएटी (VSAT) लाइसेंस और उड़ान तथा समुद्री कनेक्टिविटी के लिए भी प्राधिकरण हासिल कर लिया है। इसके जरिए एलम मल्क की कंपनी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सर्विस दे पाएगी।
अभी भी इस हरी झंडी का इंतजार – हालांकि, बता दें कि केंद्र सरकार ने अभी तक स्टारलिंक को व्यावसायिक रूप से सर्विस शुरू करने के लिए स्पेक्ट्रम नहीं दिया है। साथ ही, कंपनी को अभी सुरक्षा एजेंसियों से भी हरी झंडी नहीं मिली है।
यहां उपयोगी होगा सैटेलाइट इंटरनेट – ​सैटेलाइट इंटरनेट उन जगहों के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन है, जहां इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं या बहुत धीमी हैं। यह उन दूरदराज के इलाकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जहां केबल बिछाना मुश्किल या महंगा होता है। स्टारलिंक का लक्ष्य दुनिया भर में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना है। खासकर उन जगहों पर जहां कनेक्टिविटी की कमी है।