
ईरान-अमेरिका के मध्य चल रहे तनाव को देखते हुए इराक ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है वह अमेरिका को ईरान के खिलाफ हमले के लिए अपनी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देगा। राष्ट्रपति बरहम सालिह ने एक साक्षात्कार में कहा,‘‘हम ईरान सहित किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ हमले के लिए अपने क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं होने देंगे। यह निर्णय इराक और अमेरिका के बीच हुई संधि का हिस्सा नहीं है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वर्ष फरवरी में एक चैनल को दिये एक साक्षात्कार में कहा था कि अमेरिका, ईरान पर निगरानी के लिए इराक में अपने सैनिकों की मौजूदगी बनाए हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद इराकी संसद के उपभापति हसन काबी ने कहा था कि संसद अमेरिका के साथ हुए सुरक्षा समझौते को समाप्त करने के लिए विधेयक लाने पर विचार कर रही है जिससे देश से सभी विदेशी सैनिकों की वापसी का रास्ता साफ होगा।
सालिह ने कहा कि अमेरिका ने देश में स्थित अमेरिकी सैनिकों को ईरान पर नजर रखने के लिए इराक की सरकार से अनुमति का आग्रह नहीं किया है। अमेरिका ने इराक में वर्ष 2000 में सैन्य अभियान के लिए हजारों सैनिकों को भेजा था। इराक के साथ हुए समझौते के तहत अमेरिका ने वहां से 2011 में अपने सैनिकों वापस बुला लिया था। इसके तीन वर्ष बाद इराकी सेना की इस्लामिक आतंकवादी समूहों से चल रही लड़ाई में मदद के लिए अमेरिका ने अपने सैनिकों को भेजा था।
लगभग पांच हजार अमेरिकी सैनिक वर्ष 2018 तक इराक में थे। पिछले सप्ताह ईरान के सुरक्षाबलो ने देश के हर्मुज तटीय क्षेत्र में अमेरिका के एक ड्रोन विमान को मार गिराया था। इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा था कि ईरान जवाबी हमले के लिये तैयार रहे। अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले का आदेश दे दिया था जिसे अंतिम समय में वापस लिया गया। ईरान और छह शक्तियों के बीच 2015 में हुये परमाणु समझौते से पिछले वर्ष अमेरिका के हटने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता गया जो अब चरम पर है।
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