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नीतीश की नीति और बीजेपी की रणनीति, बिहार में मोदी-शाह ने सम्राट को क्यों बनाया BJP का चेहरा


नीतीश कुमार महिलाओं के लिए लगातार मसीहा की भूमिका में रहे। चाहे वह जीविका योजना का मामला हो या फिर महिलाओं के लिए 10 हजार रुपये सालाना देने की बात। वैसे इस मामले में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का अलग दावा है। उनका कहना है कि महिला रोजगार योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने के विजन से प्रेरित थी। पांच महीने पहले ही हमने जीविका में 10 हजार रुपये मॉडल का प्रजेंटेशन दिया था और तभी इसे मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना में शामिल कर दिया गया।
पार्टी को थी नेतृत्व की तलाश – नीतीश का यह जादू विपक्ष के सभी चुनावी वादों पर भारी पड़ गया। महिलाओं के 6 नवंबर को पहले चरण और 11 नवंबर को दूसरे चरण के मतदान में उत्साहजनक भागीदारी निभाई। इसका 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा फायदा JDU को ही हुआ। नीतीश कुमार के वोट शेयर में 3.5% का उछाल दिखा। पिछले विधानसभा चुनाव में JDU को 15.3% वोट मिले थे, जबकि 2025 के चुनाव में उसका वोट प्रतिशत 18.8 से ज्यादा रहा। BJP के वोट शेयर में एक फीसदी की बढ़त हुई। लेकिन ध्यान रहे कि इन दोनों ने पिछली बार से कम सीटों पर चुनाव लड़ा था। यह सहयोगियों को सीट देने के कारण हुआ।
BJP की जमीनी और नेतृत्व की भूमिका बिल्कुल अलग – इस जीत में BJP की जमीनी और नेतृत्व की भूमिका बिल्कुल अलग और रणनीति से जुड़ी हुई थी। यह भी सही है कि पिछले बीस सालों में BJP के प्रदेश नेतृत्व में एक भी चेहरा ऐसा नहीं निकल पाया था, जिस पर सबकी सहमति होती। प्रदेश स्तर पर सुशील मोदी जब तक थे तब तक फिर भी गनीमत थी। राष्ट्रीय स्तर पर रविशंकर प्रसाद, राजीव प्रताप रूडी आदि थे। राज्य स्तर पर कई बड़े नेता, जिनसे उम्मीद थी, ट्रांसफर पोस्टिंग में ही फंसे रह गए। ऐसे में RSS की पृष्ठभूमि से अलग आए सम्राट चौधरी की तेजी सबको समझ आती है। नीतीश कुमार का भी सम्राट पर पिछले डेढ़ साल में भरोसा काफी बढ़ा।
सम्राट चौधरी को बीजेपी ने क्यों किया प्रोजेक्ट? – इसलिए पीएम मोदी और अमित शाह ने सम्राट चौधरी को इस तरह प्रोजेक्ट किया कि वह BJP का चेहरा बन सकें। अमित शाह ने सम्राट चौधरी के विधानसभा क्षेत्र में सार्वजनिक मंच से ऐलान कर दिया कि आप सम्राट चौधरी जिताकर भेजें और हम इन्हें ‘बहुत बड़ा आदमी’ बनाएंगे। जब चुनाव परिणाम आए तो अमित शाह ने जो वादा किया था उसे पूरा भी कर दिखाया। नीतीश सरकार में बीस साल में पहली बार गृह विभाग BJP के हिस्से में गया और सम्राट चौधरी बिहार के गृह मंत्री बनाए गए। हालांकि, उन्हें गृहमंत्री बनाए जाने की कहानी दिलचस्प है।
जातीय समीकरण के हिसाब से फिट हैं सम्राट – दरअसल, जब चुनाव नतीजे आए तो BJP ने पहले से तय रणनीति के अनुसार गृह विभाग की मांग रख दी। लेकिन नीतीश जब भी सत्ता में रहे, गृह विभाग अपने पास रखा। नतीजों के दो दिन बाद JDU और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा चार्टर प्लेन से अमित शाह से मिलने दिल्ली रवाना हुए। शाह ने भी साफ किया कि वायदे के अनुसार मुख्यमंत्री तो नीतीश जी ही होंगे लेकिन गृह विभाग BJP के पास रहेगा और सम्राट चौधरी गृह मंत्री होंगे। सम्राट चौधरी जातीय समीकरण के हिसाब से भी इस पद के लिए फिट बैठ रहे थे। असल में बिहार में कुर्मी-कोइरी समीकरण जिसे लव-कुश समीकरण भी कहा जाता है, सबसे प्रभावी समीकरण है। नीतीश कुर्मी समाज से आते हैं और सम्राट चौधरी कोइरी समाज से। ऐसे में सरकार के पहले और दूसरे नंबर पर लव-कुश समीकरण सटीक बैठ रहा था।
सम्राट को प्रोजेक्ट करना सही साबित हुआ – इतना ही नहीं, चुनाव नतीजों के बाद बिहार की नई सरकार के फैसलों में भी इसकी छाप देखने को मिली। सम्राट चौधरी ने गृह मंत्री का पद संभालते ही 25 नवंबर को कानून व्यवस्था से जुड़े अहम फैसलों पर मुहर लगा दी। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों और कॉलेजों के बाहर एंटी रोमियो दस्ते तैनात करेंगे। छुट्टियों के दौरान भी विशेष पुलिस दल निगरानी करेगा। अपराध को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाई जाएगी और करीब 400 माफियाओं की पहचान भी की जा चुकी है, जिनकी संपत्तियां न्यायालय के आदेश पर जब्त की जाएंगी। अपराधियों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाएंगे। चुनाव के दौरान सम्राट को इस विराट रूप में प्रोजेक्ट करना NDA के लिए सार्थक रहा।