
हवाई यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को उड़ान भरने से पहले सलाह दी जाती है कि उन्हें अपना फोन, एयरप्लेन मोड में कर लेना चाहिए। अक्सर लोग यह मानते हैं कि ऐसा नहीं करने से विमान के नेविगेशन सिस्टम पर असर हो सकता है। विमान के उपकरणों के खराब होने की संभावना रहती है। लेकिन मौजूदा समय में जब तकनीक इतनी अधिक एडवांस हो गई है, तो क्या तब भी हवाई जहाज में एयरप्लेन मोड काे ऑन करने की जरूरत है। इसका जवाब हां है, लेकिन इसकी वजह कुछ और भी है। मीडियम की एक रिपोर्ट पढ़कर हमने इसके बारे में विस्तार से जाना।
1996 में हुई शुरुआत – रिपोर्ट के अनुसार, 1990 के दशक में स्मार्टफोन बहुत भारी और ईंट जैसे होते थे। तब तकनीक भी कम एडवांस्ड थी। 1996 में अमेरिका के FAA यानी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने सुझाव दिया कि मोबाइल फोन की वजह से रेडियो सिग्नल नेविगेशन या कम्युनिकेशन सिस्टमों पर असर हो सकता है। इस वजह से-
विमानों में फोन को बैन कर दिया गया। – बाद में जब स्मार्टफोन आए तो एयरप्लेन मोड का कॉन्सेप्ट आया ताकि ऑफलाइन गैजेट चलाया जा सके। (REF.)
2021 में बदल गई कहानी – मोबाइल फोन की वजह से विमानों को जोखिम की संभावना साल 2021 में खत्म हो गई, जब FAA ने कन्फर्म किया कि मौजूदा मोबाइल डिवाइस, कोई सुरक्षा जोखिम पैदा नहीं करते। इसके बाद भी प्लेन में यात्रियों से मोबाइल फोन को एयरप्लेन मोड में रखने को कहा जाता है। इसकी कुछ वजहें हैं।
पहला कारण: मच सकती है डिजिटल भगदड़ – रिपोर्ट के अनुसार, विमान जब हवा में उड़ता है, उस दौरान अगर यात्रियों का फोन एयरप्लेन मोड में नहीं हो, तो वह आसपास के टावरों से जुड़ने की कोशिश करेगा। इसकी वजह से ग्राउंड पर नेटवर्क प्रभावित हो सकता है। रिपोर्ट बताती है कि एक फोन कुछ मिनटों के अंदर दर्जनों मोबाइल टावरों से जुड़ने की कोशिश कर सकता है। इस वजह से बैंडविड्थ जाम हो सकती है। अगर विमान में सवार 150 यात्रियों के फोन इसी तरह का व्यवहार दिखाएंगे तो जमीन पर डिजिटल भगदड़ मच सकती है यानी टावरों की क्षमता पर असर हो सकता है।
दूसरा कारण: इसमें छुपा है मनोविज्ञान भी – मीडियम की रिपोर्ट के अनुसार, अगर यात्रियों को यह समझाना पड़े कि उनके एयरप्लेन मोड ऑन ना करने से मोबाइल नेटवर्क जाम हो सकते हैं तो यह लोगों को कम परेशान करेगा। इसके मुकाबले किसी तरह की आपदा का डर यात्रियों को तेजी से नियम मानने के लिए प्रेरित करेगा।
तीसरा कारण: यात्रियों का ध्यान ना भटके, इसलिए भी जरूरी – रिपोर्ट के अनुसार, लोगों से एयरप्लेन मोड ऑन करने को इसलिए भी कहा जाता है ताकि उनका ध्यान ना भटके।
FAA ने यात्रियों के व्यवहार पर एक स्टडी की थी। उसमें पता चला कि गैजेट के संग बिजी रहने पर 30 फीसदी यात्रियों ने सुरक्षा निर्देशों पर ध्यान नहीं दिया।
विमान के लिए लैंडिंग और टेकऑफ महत्वपूर्ण चरण होते हैं और इस दौरान कोई गड़बड़ी होने पर अगर लोगों का ध्यान अपने गैजेट में रहा तो यात्रियों की निकासी में देरी हो सकती है।
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