
उत्तर कोरिया की एक फिशिंग बोट के कैप्टन को इसलिए मौत की सजा दी क्योंकि वह एक प्रतिबंधित रेडियो स्टेशन सुनता था। रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक कैप्टन 15 साल से ये रेडियो स्टेशन सुन रहा था जिसके लिए उसे सरेआम गोली से उड़ा दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक समुद्र में सफर के दौरान उसके रेडियो में विदेशी एयरवेव आती थीं।
पहले सेना में रेडियो ऑपरेटर था : RFA की रिपोर्ट के मुताबिक चोई नाम के कैप्टन को 100 कर्मियों के सामने गोली से उड़ा दिया गया। चोई 50 से ज्यादा जहाजों का मालिक था। बताया गया है कि उसके ही किसी स्टाफ ने इस बारे में प्रशासन को जानकारी दे दी कि चोई प्रतिबंधित विदेशी रेडियो स्टेशन सुनता था। एक अधिकारी के मुताबिक चोई पहले सेना में रेडियो ऑपरेटर था और वहीं उसने विदेशी ब्रॉडकास्ट सुनना शुरू किया।
बेस से आती है विदेशी मुद्रा : नौकरी छोड़ने के बाद भी वह ऐसा करता रहा जिसकी इजाजत नहीं है। यही नहीं, फिशिंग बेस पर तैनात पार्टी अधिकारियों और सिक्यॉरिटी अधिकारियों को भी निकाल दिया गया है। दरअसल, कहा जाता है कि इस बेस से उत्तर कोरिया के नेता विदेशी मुद्रा हासिल करते हैं। सिक्यॉरिटी विभाग ने चोई के अपराध को पार्टी के खिलाफ बताया।
रेडियो फ्री एशिया के हवाले से डेली मेल ने लिखा है कि कोरोना नियमों को लेकर लोगों को डराने के लिए 28 नवंबर को उनके आदेश पर उत्तर कोरिया की सेना ने एक व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से गोली मार दी। आरोपी मृतक कोरोना प्रतिबंधों को तोड़ते हुए चीन से सामान की तस्करी करते हुए पकड़ा गया था। बता दें कि उत्तर कोरिया ने अपनी सीमा को मार्च महीने से ही आधिकारिक रूप से बंद करके रखा हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, उत्तर कोरियाई प्रशासन ने सीमा क्षेत्र के निवासियों को धमकाने के लिए आरोपी को सार्वजनिक रूप से गोली मारी। जिससे लोगों के मन मे दहशत कायम रहे। किम जोंग उन को शक है कि चीन की सीमा पर बसे लोग सीमा पार के लोगों के ज्यादा संपर्क में हैं। सीमा पर कई लोग ऐसे भी हैं जो चीन से तस्करी के काम में लिप्त हैं। ऐसे में उत्तर कोरिया को डर है कि इन लोगों के जरिए देश में कोरोना वायरस का प्रसार हो सकता है।
मृतक आदमी की उम्र 50 साल के आसपास बताई जा रही है। वह अपने चीनी पार्टनर के साथ कई महीनों से सीमा पार तस्करी के काम में लिप्त था। हाल के दिनों में उत्तर कोरिया के बार्डर गार्ड्स पर भी तस्करी में शामिल होने के आरोप लगे हैं। जिसके बाद से किम जोंग ने अपनी सेना की विशेष टुकड़ियों को बार्डर इलाके में तैनात किया हुआ है। जो क्रास बॉर्डर तस्करी के साथ सीमा पर तैनात बार्डर गार्ड्स पर भी नजर रखेंगे।
उत्तर कोरिया ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि उसके देश में आज तक एक भी कोरोना वायरस का मामला नहीं आया है। लेकिन, उसके इस दावे पर दुनिया के अधिकतर देशों को शक है। विशेषज्ञों का भी कहना है कि उत्तर कोरिया में कड़े सेंसरशिप के कारण सही सूचना का बाहर निकलना असंभव है। ऐसे में सरकार के दावे की पुष्टि नहीं की जा सकती है।
कोरोना वायरस का संक्रमण शुरू होने के बाद से ही किम जोंग उन ने अपने देश की सीमा को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर रखा है। बॉर्डर पर सख्ती इतनी है कि चीन से होने वाले व्यापार को भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इस कारण उत्तर कोरिया में रोजमर्रा के सामानों की किल्लत हो गई है। किम जोंग की सनक से परेशान उत्तर कोरिया के लोग इसी कारण देश छोड़कर चीन जाने में ही भलाई समझ रहे हैं।
हर महीनें बड़ी संख्या में उत्तर कोरिया के नागरिक चोरी-छिपे देश छोड़कर चीन जा रहे हैं। इसी कारण किम जोंग उन की परेशानी बढ़ गई है। लोगों के इस तरह बाहर जाने से नाराज उत्तर कोरिया के तानाशाह ने अब बॉर्डर पर एंटी एयरक्राफ्ट गनों को तैनात किया है। ये गन लंबी दूरी तक लोगों के ऊपर सटीक निशाना लगा सकते हैं। इनका वार इतना घातक होता है कि कोई भी बैलिस्टिक शील्ड या बॉडी आर्मर इनकी गोलियों को रोक नहीं सकता है।
दूसरों के लिए बने सबक : सूत्र के मुताबिक चोई को लगता था कि वह इस बेस का हिस्सा है, इसलिए उस पर आपराधिक चार्ज नहीं लगेगा लेकिन उसकी स्टाफ से बनती नहीं थी। यही उसे महंगा पड़ गया। देश में कई विदेशी रेडियो स्टेशनों की पहुंच है लेकिन किम जोंग का प्रशासन इसकी सख्ती से निगरानी करता है कि लोग क्या सुनते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि समुद्र में जाने वाले कई लोग विदेशी रेडियो स्टेशन सुनते हैं, इसलिए चोई को सबके सामने गोली मारी गई ताकि सबके लिए सबक हो।
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