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सऊदी अरब की घड़ी ही नहीं भारत से मिला गोल्ड मेडल भी बेच चुके हैं इमरान खान, 3 हजार रुपए में खरीद कर PCB को दिया दान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने क्रिकेट खेलने के दौरान भारत से मिले स्वर्ण पदक को ‘बेच’ दिया। क्रिकेटर से नेता बने खान (70) इन दिनों उपहार खरीदने के लिए विवादों में घिरे हैं, जिसमें एक महंगी ग्रेफ कलाई घड़ी भी शामिल है, जिसे उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में तोशाखाना से रियायती मूल्य पर प्राप्त किया था और उसे फायदे के लिए बेच दिया था। ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ अखबार के मुताबिक सोमवार को एक टेलीविजन कार्यक्रम के दौरान आसिफ ने कहा कि खान ने ‘‘स्वर्ण पदक बेच दिया जो उन्हें भारत से मिला था।’’
आसिफ ने खान द्वारा कथित तौर पर बेचे गए स्वर्ण पदक के बारे में कोई अन्य जानकारी नहीं दी। खान के ये कदम अवैध नहीं हैं, लेकिन उच्च नैतिक मानकों के विपरीत हैं जिनके बारे में खान ने हमेशा बात की थी। आमतौर पर, ऐसे उपहार को स्थायी रूप से तोशाखाना में जमा किया जाता है। खान को पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग ने तोशाखाना मुद्दे में ‘‘झूठे बयान और गलत घोषणा’’ करने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था।
इमरान ने बेचे चार उपहार – आठ सितंबर को खान ने एक लिखित उत्तर में स्वीकार किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान प्राप्त कम से कम चार उपहार बेचे थे। इस बीच, नेशनल असेंबली के एक सत्र को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने खान पर कटाक्ष किया और कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ‘‘सत्ता के लिए पागल हो गए हैं।’’ उन्होंने कहा कि खान को उन संस्थानों को निशाना नहीं बनाना चाहिए जिन्होंने पिछले चार वर्षों के दौरान ‘‘बिना शर्त उनका समर्थन किया।’’
तीन हजार में खरीदा इमरान का मेडल – पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने इमरान के तोहफे बेचने के मामले का जिक्र किया है। हामिद मीर ने एक टीवी कार्यक्रम में उस शख्स से बात की, जिसने इमरान खान का गोल्ड मेडल खरीदा था। कसूर के रहने वाले शकील अहमद ने दावा किया कि उन्होंने साल 2014 में 3 हजार पाकिस्तानी रुपए लगभग 1100 रुपए में मेडल को ओपेन मार्केट में खरीदा था। उन्होंने गोल्ड मेडल इमरान को लौटाने की कोशिश की, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सके। इस बात पर हामिद मीर ने हैरानी जताई और यह पूछा कि भला इमरान का मेडल ओपेन मार्केट में कैसे आ गया? शकील ने कहा कि बाद में उन्होंने इसे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को दिखाया और तब PCB ने इस मेडल को खरीदने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने इसे मुफ्त में ही दान दे दिया।

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