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ट्रंप को पाकिस्‍तान ने द‍िया धोखा, सच हुई तालिबान की भविष्‍यवाणी, ईरानी विमानों को शरण देने पर बोले एक्सपर्ट


पाकिस्तान ने अमेरिका से युद्ध के दौरान ईरान के विमानों को अपने एयरबेस पर शरण दी थी। इस बात का खुलासा अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सीबीसी न्यूज ने किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान खुद को एक निष्पक्ष पक्ष और मध्यस्थ के रूप में पेश करने के बावजूद पाकिस्तान ने “चुपचाप” ईरानी सैन्य और निगरानी विमानों को अपने हवाई अड्डों पर पार्क करने की अनुमति दी। अमेरिकी अधिकारियों ने सीबीसी न्यूज को बताया कि पाकिस्तान ने शायद इन विमानों को संभावित अमेरिकी हवाई हमलों से प्रभावी ढंग से बचाया होगा।
हालांकि पाकिस्तान ने मंगलवार को सीबीसी न्यूज की रिपोर्ट का खंडन किया है जिसमें दावा किया गया था कि ईरान के विमान नूर खान एयरबेस पर पार्क किए गये थे ताकि अमेरिका उसपर हमला ना करे। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा है कि ये विमान ईरान और अमेरिका से जुड़े राजनयिक और प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े हैं जो संघर्ष विराम वार्ता के दौरान वहां पहुंचे थे। इस्लामाबाद ने जोर देकर कहा है कि इन विमानों की कोई सैन्य भूमिका नहीं थी और रिपोर्ट पर भ्रामक अटकलें फैलाने का आरोप लगाया।
पाकिस्तान के दोगलेपन का इतिहास – पाकिस्तान भले कुछ सफाई दे लेकिन इस्लामिक देश अपने दोगलेपन के लिए कुख्यात रहा है। भला कौन भूल सकता है जब पाकिस्तान के पूर्व आईएसआई चीफ जनरल हामिद गुल ने कहा था “ISI ने अमेरिका की मदद से अफगानिस्तान में सोवियत यूनियन को मात दी और फिर एक और जुमला होगा कि ISI ने अमेरिका की मदद से अमेरिका को हरा दिया।” हामिद गुल का ये बयान, अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों का पीठ दिखाकर भागना, तालिबान के शासकों का काबुल पर कब्जा और डोनाल्ड ट्रंप का पाकिस्तान प्रेम ये साफ बताता है कि अमेरिकी अभी भी पुरानी गलतियों से सीखे नहीं हैं। सीबीसी की रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि एक तरफ पाकिस्तान अमेरिका से बात कर रहा था और दूसरी तरफ ईरान की मदद कर रहा था।
सीबीसी न्यूज की इस रिपोर्ट के बाद डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है “अगर यह रिपोर्ट सही है तो ईरान अमेरिका और अन्य पक्षों के बीच मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका का पूरी तरह से पुनर्मूल्यांकन करना होगा। इजरायल के प्रति पाकिस्तानी रक्षा अधिकारियों के कुछ पिछले बयानों को देखते हुए अगर यह बात सच निकलती है तो मुझे कोई हैरानी नहीं होगी।”
तालिबान की भविष्यवाणी सच साबित – भारत के दिग्गज स्ट्रैटजिस्ट सुशांत शरीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है “पाकिस्तान में तालिबान के पूर्व राजदूत अब्दुस सलाम जैफ के ये अमर शब्द याद आते हैं ‘पाकिस्तान… धोखेबाज़ी के लिए इतना मशहूर है कि कहा जाता है कि वे एक बैल से भी दूध निकाल सकते हैं। उनके एक मुंह में दो जबानें और एक सिर पर दो चेहरे हैं, ताकि वे हर किसी की भाषा बोल सकें। वे हर किसी का इस्तेमाल करते हैं, हर किसी को धोखा देते हैं। वे खुद को एक इस्लामी परमाणु शक्ति बताकर अरबों को धोखा देते हैं, यह कहते हुए कि वे इस्लाम और इस्लामी देशों की रक्षा कर रहे हैं। वे आतंकवाद के खिलाफ गठबंधन में अमेरिका और यूरोप से फायदा उठाते हैं और वे कश्मीरी जिहाद के नाम पर पाकिस्तानियों और दुनिया भर के अन्य मुसलमानों को धोखा देते रहे हैं। लेकिन पर्दे के पीछे वे हर किसी के साथ विश्वासघात करते रहे हैं।”