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अमेरिका-ईरान जंग में मध्यस्थ बन फंसा पाकिस्तान, मुनीर की निष्पक्षता पर सवाल, एक्सपर्ट ने बताया तेहरान ने क्यों किया किनारा


ईरान-अमेरिका युद्ध रुकवाने को लेकर पाकिस्तान की ओर से लगातार बड़े दावे किए गए हैं। खासतौर से पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर चर्चा में रहे हैं। दोनों ने 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका की बैठक कराने में कामयाबी भी पाई लेकिन दूसरे दौर की वार्ता में पाकिस्तानी नेता फंसते नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान की ओर से वार्ता को लेकर जो बातें कही गईं, वो पूरी होती नजर नहीं आ रही हैं। ऐसे में पाकिस्तानी खुद को ईरान और अमेरिका के बीच फंसा हुआ पा रहे हैं।
अमेरिकी पत्रकार और लेखक जेरेमी स्कहिल का कहना है कि ईरान वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका सवालों के घेरे में है क्योंकि उसकी ओर से जो आश्वासन दिए गए थे, वो पूरे नहीं हुए। खासतौर से ईरान को अमेरिकी नाकेबंदी हटने का भरोसा दिया गया था लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी जारी रखी है। अब असीम मुनीर और शहबाज शरीफ के पास ईरान के सवालों का जवाब नहीं है।
पाकिस्तान की मध्यस्थ के तौर पर भूमिका सवालों के घेरे में है क्योंकि उसकी ओर से ईरान को दिए आश्वासन पूरे नहीं हुए। ईरान को अमेरिकी नाकेबंदी हटने का भरोसा दिया था लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी को जारी रखा है। इससे पाकिस्तान को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। जेरेमी स्कहिल
पाकिस्तान को उठानी पड़ रही शर्मिंदगी – स्कहिल के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने उनसे बताया है कि उनको नहीं पता कि पाकिस्तान से क्या कहा गया था लेकिन वह अपने वादे पूरे नहीं कर पा रहे हैं। ईरानी अधिकारियों ने पाकिस्तानी मध्यस्थों को ट्रंप के बदलते रुख पर ‘हड़बड़ाते हुए’ बताया है। पाकिस्तान के साथ ये हो रहा है कि खुद को बेहतरीन कूटनीतिक मध्यस्थ के तौर पर पेश करने के बाद अब उसे शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है।
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में भी असीम मुनीर पर सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट करहती है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख अमेरिका-ईरान वार्ता के अप्रत्याशित मध्यस्थ बनकर उभरे हैं। वह ईरान के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं और वाइट हाउस के साथ भी संपर्क में हैं। इसके बावजूद उनकी निष्पक्षता और समझौता कराने की क्षमता पर संदेह है।
मुनीर की अमेरिका-सऊदी से करीबी – इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप थिंक-टैंक के ईरान विशेषज्ञ अली वाएज ने मुनीर के नजरिए को ‘मध्यस्थता के लिए समग्र प्रणालीगत दृष्टिकोण’ बताया है। वे व्यक्तिगत रूप से ईरान के हर प्रमुख शक्ति केंद्र से संपर्क कर रहे हैं ताकि कोई गुट उपेक्षित महसूस ना करे। इससे उनको भरोसा था कि ईरान वार्ता के दूसरे दौर में आएगा। इसके लिए तैयारी की गई लेकिन तेहरान के कोई नहीं आया।
विश्लेषक पाकिस्तान की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ एक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तान के डोनाल्ड ट्रंप के करीबी लोगों के साथ वित्तीय संबंध हैं। पाकिस्तान ने नौसैनिक नाकाबंदी की सार्वजनिक आलोचना करने और लेबनान युद्धविराम पर बयानबाजी से दूरी बनाने की कोशिश की है। इससे ईरान पर शंका बढ़ी है।