
‘इंटरनेशनल कमेटी ऑफ दी रेड क्रॉस’ ने सोमवार को यह जानकारी दी कि दुनियाभर में एक लाख से ज्यादा लोग लापता हैं जिसके कारण वैश्विक संकट खड़ा हो गया है। संगठन की संरक्षण सलाहकार एग्नेस काउटो ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की मानवाधिकार समिति को बताया कि लापता लोगों की यह संख्या अब तक की सर्वाधिक है।उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि यह आंकड़ा तो रत्ती मात्र है। संभवत: संघर्षों के कारण लापता हुए लोगों के बारे में यह आंकड़ा उनका एक छोटा सा हिस्सा ही दिखाता है।
ये है लोगों के लापता होने का मुख्य 3 कारण
‘इंटरनेशनल कमेटी ऑफ दी रेड क्रॉस’ संघर्षों से गुजर चुके और संघर्षों का सामना कर रहे 40 से अधिक देशों के अधिकारियों और लापता लोगों के परिवारों के साथ काम करती है। यह उन पांच संगठनों की भी प्रमुख है जो लापता लोगों से संबंधित मामलों को हल करने की कोशिश कर रहे हैं। काउटो ने कहा कि तीन कारण हैं जो समस्या को गंभीर बना रहे हैं।
पहला कारण है सैन्य संघर्ष जो बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के जिम्मेदार हैं, दूसरा कारण दशकों से लापता लोगों के परिवारों पर पीढ़ी दर पीढ़ी पडऩे वाला असर और तीसरा कारण समस्या का बढ़ता अंतरराष्ट्रीयकरण है। काउटो ने यह भी उम्मीद जताई कि संयुक्त राष्ट्र के कई सदस्य देश लापता लोगों का पता लगाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को और अधिक पुख्ता करेंगे और उन लोगों की मदद करेंगे जो अपने परिजन के बारे में सूचना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
ढूंढा जाएगा लापता लोगों को
उन्होंने कहा कि ‘इंटरनेशनल कमेटी ऑफ दी रेड क्रॉस’ चाहती है कि लोगों को लापता होने से बचाने के लिए ऐहतियाती कदम जल्द उठाए जाएं और लापता लोगों की खोज की हरसंभव कोशिश के साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि वह जीवित हैं भी या नहीं। ऐहतियाती कदमों का मतलब है कि जो लोग हिरासत में हैं उनका पंजीयन करना, उनका उनके परिवारों से संपर्क करवाना, सभी लापता लोगों से संबंधित जानकारी को केंद्रीकृत करना, मानव अवशेषों की पहचान करना और कब्रों का संरक्षण करना।
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