
सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ मक्का समझौते को लेकर तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन का अपने ही देश में भारी विरोध हो गया है। तुर्की के विपक्षी नेता ओजगुर ओजेल ने चेतावनी दी कि इससे तुर्की, सऊदी और तुर्की के संघर्ष में फंस सकता है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की समस्या को तुर्की की समस्या नहीं बनाया जाना चाहिए। यह आलोचना ऐसे समय में आई है, जब तुर्की ने हूती हमलों को मुकाबला करने के लिए सऊदी अरब में सैनिक और सैन्य मदद भेजने का फैसला किया है।
तुर्की में मक्का समझौते का विरोध – मंगलवार को अपनी पार्टी के संसदीय समूह की बैठक में ओजेल ने एर्दोगन सरकार पर आरोप लगाया कि संसद से समझौते की मंजूरी से पहले ही सैनिकों की तैनाती का वादा कर दिया गया। उन्होंने कहा कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का मतलब है कि सऊदी अरब से जुड़े युद्ध में तुर्की एक पक्ष बन जाएगा।
ओजेल ने मक्का समझौते का शर्त का जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। ओजेल ने कहा, “दूसरे शब्दों में अब से सऊदी अरब की समस्या हमारी समस्या होगी।” यह समझौता तीनों देशों को आपसी रक्षा के प्रतिबद्ध करता है।
ट्रंप के आदेश पर चलने वाला सैनिक नहीं तुर्की – ओजेल ने तुर्की की सरकार के डोनाल्ड ट्रंप की क्षेत्रीय रणनीति के साथ जुड़ने की भी आलोचना की। तुर्की के विपक्षी नेता ने चेतावनी दी कि अंकारा को वॉशिंगटन की क्षेत्रीय नीति के अधीन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम ट्रंप के आदेश पर चलने वाले सैनिक बनना स्वीकार नहीं करते हैं।”
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