
यूके की रॉयल नेवी का लिटोरल रिस्पॉन्स ग्रुप (LRG) मंगलवार को चेन्नै पहुंचा। ये इंडियन पेसिफिक रीजन में यूके शिप के पहले डिप्लॉयमेंट का हिस्सा है। यह भारत और यूके के बीच मेरीटाइम कॉरपोरेशन में एक अहम कदम है। कुछ साल पहले ही यूके की नेवी ने लिटॉरल रिस्पॉन्स ग्रुप (LRG) बनाए हैं। ये रॉयल नेवी का टास्क ग्रुप है जिसमें कम से कम दो एंफिबियस वॉरफेयर शिप यानी युद्धपोत होते हैं, रॉयल मरीन की एक कंपनी होती है साथ ही सपोर्टिंग एलिमेंट होते हैं।
इंडियन शिपयार्ड में होगा रॉयल नेवी शिप का मेंटेनस – रॉयल फ्लीट ऑक्सिलरी (RFA) आर्गस और RFA लाइम बे के नेतृत्व में जब यूके नेवी का ग्रुप अरब सागर में पहुंचा तो इंडियन नेवी के साथ समुद्र में एक्सरसाइज की। अब, ये चेन्नै के पास कट्टुपल्ली में लार्सन एंड टूब्रो शिपयार्ड में रखरखाव यानी मेंटेनेंस के लिए जाएंगे। पहली बार रॉयल नेवी के शिप का मेंटेनेंस इंडियन शिपयार्ड में होगा। यूके हाईकमिशन ने एक बयान जारी कर बताया कि 2022 में भारत और यूके के बीच लॉजिस्टिक शेयर करने को लेकर जो एग्रीमेंट हुआ था यह उसका नतीजा है।
रॉयल शिप की ये विजिट है बेहद खास – ब्रिटिश हाईकमिशन में डिफेंस एडवाइजर ब्रिगेडियर निक सॉयर ने कहा कि रॉयल शिप का यह विजिट अहम है यह इंडो पेसिफिक को लेकर यूके की प्रतिबद्धता भी दिखाता है। रखरखाव के बाद यूके का लिटॉरल रिस्पॉन्स ग्रुप इंडो पेसिफिक में अपने ऑपरेशन जारी रखेगा। रीजन में अपने सहयोगियों और पार्टनर देशों के साथ ट्रेनिंग और एक्सरसाइज भी करेगा।
टिकट कटने से नाखुश वरूण गांधी, क्या इस डर से नहीं हो रहे बागी? – जनवरी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जब यूके का दौरा किया था तब दोनों देशों के रक्षा संबंधों और सहयोग को मजबूत करने की बात कही थी। कई समझौतों पर भी बात हुई थी। तब यह भी तय किया कि 2030 से पहले भारत और यूके की मिलिट्री ज्यादा बड़ी और ज्यादा कॉम्प्लेक्स जॉइंट एक्सरसाइज करेंगे। दोनों का मकसद क्रिटिकल ट्रेड रूट (समंदर के ट्रेड रूट) को प्रोटेक्ट करना है। जॉइंट एक्सरसाइज के दौरान ट्रेड रूट को प्रोटेक्ट करने पर ध्यान दिया जाएगा।
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