Saturday , October 31 2026 10:05 PM
Home / Uncategorized / पोलैंड में कोर्ट चीफ को हटाने पर बवाल, ‘तख्तापलट’ की कोशिश का दावा, राष्ट्रपति ने बीच रास्ते से मोड़ा प्लेन

पोलैंड में कोर्ट चीफ को हटाने पर बवाल, ‘तख्तापलट’ की कोशिश का दावा, राष्ट्रपति ने बीच रास्ते से मोड़ा प्लेन


पोलैंड में कोर्ट प्रेसिडेंट के निलंबन के बाद राजनीतिक और संवैधानिक संकट गहरा गया है। पोलैंड की शीर्ष अदालत के नियंत्रण को लेकर हुए गतिरोध के बाद विदेश यात्रा पर जा रहे राष्ट्रपति आधे रास्ते से लौट आए हैं और कांस्टीट्यूशनल ट्रिब्यूनल पर पुलिस सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। अदालत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निलंबन और तख्तापलट के दावों ने देश में कई तरह की आशंकाओं और अटकलबाजियों को जन्म दिया है। इस विवाद की जड़ में न्यायपालिका और संवैधानिक ट्रिब्यूनल (शीर्ष अदालत) पर नियंत्रण है। इसमें एक ओर प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की लिबरल सरकार है तो दूसरी तरफ राष्ट्रपति कारोल नावरोकी और विपक्षी दल लॉ एंड जस्टिस (PiS) है।
पोलैंड के संवैधानिक न्यायाधिकरण (कांस्टीट्यूशनल ट्रिब्यूनल) ने शनिवार को बताया कि अदालत के अध्यक्ष बोगदान स्विएच्कोव्स्की और उपाध्यक्ष बार्टलोमी सोचान्स्की को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की घोषणा न्यायाधीश अन्ना कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने की। उन्होंने कहा कि कानून के शासन को बहाल करने के लिए यह जरूरी कदम है। सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाली न्यायाधीश होने के नाते उन्होंने कहा कि अब वह न्यायाधिकरण का नेतृत्व कर रही हैं।
राष्ट्रपति ने यात्रा बीच में छोड़ी – इस निलंबन की खबर सामने आने के वक्त पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवाप्रोकी सेनेगल की यात्रा पर जा रहे थे। उन्होंने अपना विमान वापस मोड़ लिया। उन्होंने कहा कि से समय में राष्ट्रपति का पोलैंड में होना जरूरी है। इसलिए मैं सेनेगल की अपनी यात्रा बीच में ही छोड़ वापस लौट रहा हूं।
दूसरी ओर अदालत के पास दंगा-रोधी पुलिस तैनात कर दी गई। प्रदर्शनकारियों ने अदालत के अध्यक्ष को मौजूदा यूरोपीय-समर्थक सरकार की ओर से गलत तरीके से हटाए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कई लोगों ने ‘टस्क गद्दार है’ के नारे लगाए। इस प्रदर्शन पर अदालत के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर कहा गया कि यह एक ‘तख्तापलट’ है।
देश में हुई घटनाओं को देखते हुए मेरा मानना ​​है कि अब मेरे लिए पोलैंड गणराज्य के राजदूत के रूप में काम करते रहना संभव नहीं है। आज मैंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और वापस बुलाए जाने का अनुरोध किया है। चीन में पोलैंड के राजदूत जैकुब कुमोच
क्या है पूरा विवाद – पोलैंड के शीर्ष न्यायिक निकाय (संवैधानिक न्यायाधिकरण समेत) सरकार और मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय रूढ़िवादी लॉ एंड जस्टिस (PiS) के बीच विवाद का कारण है। PiS ने 2015 से 2023 तक देश का नेतृत्व किया था। पोलैंड और यूरोपीय संघ (EU) के आलोचकों का आरोप है कि PiS ने अदालत सहित प्रमुख न्यायिक संस्थानों पर अपना राजनीतिक नियंत्रण थोपा।
उस समय इन सुधारों के कारण यूरोपीय संघ ने पोलैंड पर जुर्माना भी लगाया था। यह अदालत अक्सर EU के कानूनों के बजाय पोलैंड के कानूनों के पक्ष में फैसले सुनाती थी। यूरोपीय संघ का कहना था कि यह अदालत उस समय की राष्ट्रवादी राजनीतिक सत्ता के बहुत करीब थी।
मौजूदा सरकार का पक्ष – प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की यूरोपीय समर्थक सरकार 2023 में सत्ता में आई, जिसने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बहाल करने का वादा किया था। तब से PiS से जुड़े दो लगातार राष्ट्रपतियों (नवरोकी भी शामिल) ने सरकार के इन प्रयासों को वीटो (रोक) कर दिया है। टस्क की सरकार कई हफ्तों से PiS के कार्यकाल में नियुक्त किए गए जजों को हटाने की कोशिश कर रही है।
पिछली सरकार के दौरान श्विएचकोव्स्की अदालत के प्रमुख बने थे। टस्क का आरोप हा कि उन्होंने संसदीय बहुमत से चुने गए जजों को अपना पद संभालने से रोका है। ऐसे में कानून के शासन को बहाल करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि PiS के शासनकाल में वर्षों तक कानून-व्यवस्था ना होने के बाद यह एक कठिन प्रक्रिया हैऔर इसके लिए निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है।
विरोध में उतरा विपक्ष – मुख्य विपक्षी दल PiS के नेताओं ने इस निलंबन की आलोचना की। पूर्व न्याय मंत्री जबिग्न्यू जियोब्रो ने शुक्रवार शाम को एक्स पर लिखा कि यह संवैधानिक व्यवस्था पर एक खुला और आपराधिक हमला है। इसलिए मैं ऐसे प्रतिरोध का आह्वान करता हूं, जो जोरदार, दृढ़, एकजुट और निडर हो। इसी रस्साकशी का असर शनिवार को सड़कों पर दिखा, जब तख्तापलट तक की बातें की गईं।