
इजरायल और हमास के बीच चल रहे खूनी युद्ध को लेकर पूरी दुनिया दो भागों में बंट गई है। भारत ने जहां हमास के आतंकी हमले की आलोचना की है, वहीं फलस्तीन का भी खुलकर समर्थन किया है। इस बीच भारत के एक दोस्त देश आर्मीनिया के लोगों ने खुलकर इजरायल की आलोचना की है और उसके पूर्व सैनिकों और अधिकारियों ने तो यह भी कह दिया है कि वे यहूदियों की हत्या में हमास की मदद करेंगे। आर्मीनिया पूर्व सोवियत संघ के उन देशों में शामिल है जहां इजरायल के प्रति नफरत बहुत ज्यादा है। इसके पीछे एक बड़ी वजह अजरबैजान है जिसकी इजरायल खुलकर हथियारों की मदद करता है। वहीं ईरान आर्मीनिया की हर तरह से मदद करता है।
आर्मेनियाई सेना के एक पूर्व सलाहकार व्लादिमीर पोघिस्यान ने खुद को यहूदी-विरोधी गाली में फिल्माया है। इसमें उसने दावा किया है कि वह यहूदियों को मारने में हमास और हिजबुल्ला की सहायता करेगा। उन्होंने कहा, ‘मैं पूरी दुनिया को यहूदियों की सिर्फ हत्या के बारे में कहूंगा।’ राजनीतिक वैज्ञानिक व्लादिमीर को आर्मेनिया में राष्ट्रीय सुरक्षा का विशेषज्ञ माना जाता है। उन्होंने हाल ही में इजरायल में 7 अक्टूबर को हुए नरसंहार के बाद यहूदियों के खिलाफ अपमानजनक बयान देते हुए यह वीडियो बनाया है।
‘यहूदियों को धरती पर रहने का अधिकार नहीं’ – लादिमीर ने कहा, ‘तुम भेड़ियों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाना चाहिए।’ वह अतीत में आर्मेनिया के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ के सलाहकार थे। व्लादिमीर आर्मेनिया के राष्ट्रपति के पूर्व मुख्य सलाहकार के सहायक भी थे। उन्होंने वीडियो की शुरुआत में कहा, “यहूदी एक विनाशकारी लोग हैं, जिन्हें इस धरती पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। इजरायल एक फासीवादी राज्य है… आप यहूदी हैं… हमारे लोगों को मारने में अजरबैजान की मदद कर रहे हैं। आप उन्हें हथियारों की आपूर्ति करते हैं।’ हाल ही में इजरायल में आर्मेनिया के राजदूत अरमान अकोपियन ने कहा था कि अजरबैजान नागोर्नो-कराबाख पर अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए इजरायली हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। इसमें आम नागरिकों पर हमला भी शामिल है।
हाल के वर्षों में आर्मीनिया और इजरायल के बीच संबंध जटिल हो गए हैं। गत 7 अक्टूबर के हमास के नरसंहार के बाद आर्मीनियाई विदेश मंत्रालय ने शोक संदेश ट्वीट किया था जिसमें हमास या नागरिकों के घरों में आतंकवादियों के हमले का उल्लेख नहीं था। आर्मीनिया ने कहा, ‘हम फलस्तीन और इजरायल के बीच हिंसा से स्तब्ध हैं और नागरिक आबादी को निशाना बनाया जा रहा है। हम पीड़ितों के रिश्तेदारों के प्रति संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। हम हिंसा रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय अपीलों में शामिल होते हैं।’
भारत कर रहा है आर्मीनिया की खुलकर मदद – दरअसल, इजरायल ने अजरबैजान की हथियारों से खुलकर मदद की जिससे उसने नागर्नो-कराबाख पर कब्जा कर लिया। आर्मीनियाई मूल के हजारों की तादाद में लोगों को वहां अपना घर छोड़कर भागना पड़ा है। इसी से दोनों देशों के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हैं। वहीं भारत आर्मीनिया की पिनाका रॉकेट से लेकर तोपों तक की मदद कर रहा है। आर्मीनिया करोड़ों डॉलर के हथियार भारत से खरीद रहा है।
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