
पेरिस। प्रधानमंत्री एडवर्ड फिलिप ने मंगलवार को पेट्रोलियम ईंधन पर करों में प्रस्तावित वृद्धि को वापस लेने की घोषणा कर दी। सरकार के इस कदम को जनता के हिसक विरोध को शांत करने के लिए यू-टर्न के तौर पर देखा जा रहा है। यह जानकारी फ्रेंच मीडिया ने दी।
उधर, मंगलवार को भी जहां प्रदर्शनकारियों ने कई ईंधन डिपो को नहीं चलने दिया वहीं जोर देकर कहा कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। ले मोंडे अखबार और फ्रांस इंफो रेडियो ने कहा है कि ईंधन करों में वृद्धि को कई महीनों तक टाला जा सकता है।
इसके अलावा माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री फिलिप तनाव को कम करने के लिए कुछ अन्य उपायों की भी घोषणा कर सकते हैं। इस संबंध में देर मंगलवार आधिकारिक घोषणा की उम्मीद है। हालांकि उनके कार्यालय से इस संबंध में कोई तत्काल टिप्पणी नहीं मिली।
ले मोंडे अखबार ने फिलिप के हवाले से बताया, ‘हमें फ्रांस के लोगों को स्वयं निर्णय लेने का अधिकार देना होगा। हम राष्ट्रीय असेंबली में कल बहस करेंगे, जिसके बाद वोटिंग होंगी, इसके बाद हम फिर एक बड़ी बहस करेंगे।’
प्रमुख समाजवादी और राष्ट्रपति के उम्मीदवार रहे सेगोलीन रॉयल ने इसे देर से उठाया गया सही कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय शुरुआत में ही ले लेना चाहिए था। सरकार के इस निर्णय से पेंशनभोगियों को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई।
विरोध प्रदर्शन करने वाले समूहों के नेताओं में से एक बेंजामिन कौची ने कहा कि लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए उठाया गया यह पहला कदम है, लेकिन हम इतने से मानने वाले नहीं। उन्होंने कहा कि यह कह पाना संभव नहीं है कि कर वापसी की इस घोषणा के बाद पेरिस में इस सप्ताह के अंत में होने वाले विरोध प्रदर्शन नहीं होंगे।
एक जनवरी से ईंधन करों में यह वृद्धि होनी थी। प्रस्ताव के मुताबिक एक लीटर गैसोलीन की कीमत में चार यूरो सेंट (2.93 रुपये के लगभग) की बढ़ोतरी होनी थी। गैसोलीन की वर्तमान में कीमत 1.42 यूरो (114 रुपये से कुछ ज्यादा) प्रति लीटर है जो डीजल से थोड़ी ज्यादा है।
बता दें कि ईंधन करों में वृद्धि प्रस्ताव के बाद मैंक्रो सरकार के खिलाफ आम लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था। राष्ट्रपति पर ऐसी नीतियां लागू करने का आरोप है जिनकी वजह से निचली आय वर्ग वाले परिवार प्रभावित हो रहे हैं। अक्टूबर में सोशल मीडिया से इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी जो 17 नवंबर से हिसक आंदोलन में तब्दील हो गई। पीली जर्सी पहनकर किए जाने वाले इस आंदोलन को येलो वेस्ट’ आंदोलन कहा जाता है। इसमें अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं।
पिछले तीन सप्ताह से चल रहे येलो वेस्ट आंदोलन से फ्रांस के व्यापार और अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। औद्योगिक समूहों और व्यापारिक संगठनों के साथ बैठक के बाद वित्त मंत्री ब्रूनो ली मेरी ने बताया कि आंदोलन से राजस्व में 15 से 50 फीसद की गिरावट दर्ज की गई। खुदरा विक्रेताओं की बिक्री में 20 से 40 के बीच गिरावट दर्ज की गई जबकि होटल उद्योग की बुकिंग पर 15 से 25 फीसद की गिरावट दर्ज की गई।
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