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बांग्लादेश में विपक्ष ने किया बहिष्कार, तो क्‍या दिखावा हैं चुनाव? शेख हसीना के चौथी बार पीएम बनने का रास्ता साफ!


बांग्लादेश में 12वें आम चुनाव के लिए इस रविवार को वोट डाले जाएंगे। चुनाव में विपक्ष के बहिष्कार के चलते प्रधानमंत्री शेख हसीना को चौथी बार जीत मिलने की संभावना दिख रही है। विपक्षी दल बीएनपी के वाइस चैयरमैन तारिक रहमान ने इस चुनाव को शेख हसीना के शासन को मजबूत करने के लिए रचा गया ‘दिखावा’ बताया है। चुनाव में भाग ना लेने के फैसले पर रहमान ने कहा कि जिस चुनाव के नतीजे पहले से तय हों, उसमें हिस्सेदारी का कोई मतलब नहीं है। चुनाव पारदर्शी तरीके से नहीं हो रहे हैं, ऐसे में उनकी नेता खालिदा जिया और पार्टी के बाकी नेताओं ने बहिष्कार का फैसला लिया है।
रहमान की पार्टी बीएनपी ने बीते साल, 2023 में प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग करते हुए करीब महीने तक विरोध प्रदर्शन किए। ये विरोध प्रदर्शन कई शहरों में हिंसक भी हुए और इनमें कम से कम 11 लोग मारे गए और बीएनपी के हजारों समर्थकों को गिरफ्तार किया गया। प्रदर्शन के बावजूद बीएनपी की शेख हसीना के इस्तीफे और कार्यवाहक सरकार की अगुवाई में चुनाव की बात को नहीं माना गया। जिसके बाद बीएनपी चुनाव से हट गई। रहमान का कहना है कि दे एक-दलीय शासन की ओर बढ़ रहा है। बीएनपी ही नहीं कई दूसरे देशों ने भी मतदान के तौर तरीकों के बारे में अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।
2009 से सत्ता में हैं शेख हसीना – शेख हसीना 2009 से बांग्लादेश की सत्ता में हैं, उन पर 2014 और 2018 के चुनाव में भी धांधली के आरोप लगे और इस बार भी लग रहे हैं। हालांकि वह बार-बार ये कही है कि चुनाव पूरी तरह से पारदर्शी होगा। उन्होंने शनिवार की एक अभियान रैली में कहा कि दुनिया को दिखाने के लिए सुबह मतदान केंद्रों पर जाएं और वोट डालकर बताएं कि स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव कैसे कराया जाता है। शेख हसीना की अपील के बावजूद चुनाव परिणाम को लेकर आश्वस्त होने की वजह से मतदाताओं को मतदान को लेकर उत्साह नहीं है।
गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल शिक्षक सईदुज्जमा कहते हैं कि उनका पूरा परिवार कट्टर अवामी लीग समर्थक हैं लेकिन इस बार मतदान में कोई आकर्षण नहीं है। मैं जानता हूं कि वह सत्ता में फिर से आ रही हैं। किराना दुकान चलाने वाली अवामी लीग समर्थक मिनोती रोसारियो को उन्हें लगता है कि उनका वोट मुश्किल से ही मायने रखता है क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी वैसे भी जीत रही है।