
राष्ट्रीय कयाकिंग एवं केनोईंग चैंपियनशिप-2017
विवेक शर्मा, इंदौर से |
इंदौर, 9 जनवरी 2017: इन दिनों इंदौर के बिलावली तालाब में 27 वीं सीनियर, जूनियर एवं सब जूनियर कयाकिंग एंड केनोईंग चैंपियनशिप खेली जा रही है। 9 से 13 जनवरी तक चलने वाली इस चैंपियनशिप में देश भर से आए तकरीबन 900 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इंडियन कयाकिंग एंड केनोईंग संघ के अध्यक्ष एस.एम. हाशमी के कहते हैं कि ओलंपिक गेम्स में कयाकिंग और केनोईंग में कुल 16 गोल्ड मेडल होते हैं और अगले दो वर्षों में संघ की कोशिशों के नतीजे दिखने लगेंगे। हाशमी के मुताबिक “हमारा लक्ष्य 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में पदक जीतने का और टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों में क्वालिफाई करने का है”। वहीं संघ के महासचिव बलबीर सिंह कुशवाह सिस्टम की खामी को भी उजागर करने से नहीं चूके। उनके मुताबिक “करियर की शुरुआत में पक्की नौकरी के बाद खिलाड़ियों के प्रदर्शन में गिरावट आती है इसलिए उन्हें पहले स्कॉलरशिप दी जानी चाहिए और करियर के आखिरी में पक्की नौकरी देनी चाहिए” । भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की कोच एल विश्वेश्वरी देवी को केनोईंग में मध्यप्रदेश की महिलाओं से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद है। कोच की इस बात की पुष्टि 1000 मीटर के सिंगल केनोईंग ईवेंट की गोल्ड मैडल जीतने वाली अंजलि वशिष्ठ ने कर दी ।साथ ही उन्होंने दावा भी किया कि “मेरा लक्ष्य एशियन गेम्स में पदक जीतना है।” साई के एक और कोच मयंक ठाकुर ने इंदौर की तैयारियों और माहौल को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए काफी अच्छा बताया । उनका मानना है कि मौजूदा चैंपियनशिप में निश्चित तौर पर भविष्य के चैंपियन तैयार हो रहे हैं और ट्रेक, पानी की गुणवत्ता और हवा की रफ्तार तीनों ही बातें इंदौर में नए ऱाष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने में मददगार साबित होंगे। इंदौर में चल रही राष्ट्रीय चैंपियशिप में डोपिंग फ्री बनाया गया है और संघ के मुताबिक नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी इस चैंपियनशिप से सैंपल एकत्र करेगी। तमाम प्रयासों और खिलाड़ियों की जी-तोड़ मेहनत को देखते हुए लगता है कि जकार्ता एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ी इस खेल में कामयाब का झंडा बुलंद कर सकते हैं।
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