
बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार सत्ता में आने के बाद से देश में शांति की उम्मीद जगाई थी, लेकिन अब हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। पिछले साल के विद्रोह में सैंकड़ों लोगों की हताहतियाँ हुईं और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अगस्त में भारत में शरण लेनी पड़ी थी। आज, पाकिस्तान से हाथ मिलाते ही यूनुस की किस्मत में नया उलटफेर हो गया है और बांग्लादेश एक बड़े बिजली संकट के कगार पर है।
बिजली संकट और भारी बकाया – सरकारी सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) पर विभिन्न बिजली उत्पादकों (IPP) और पेट्रोबांग्ला को बिजली व गैस खरीद के लिए कुल 43,473 करोड़ टका का बकाया है। इस राशि में से:
– भारतीय अडानी समूह को 10,309 करोड़ टका,
– स्थानीय IPPs को लगभग 16,000 करोड़ टका,
– साथ ही ज्वॉइंट वेंचर बिजली संयंत्र (पायरा और रामपाल सहित) 10,000 करोड़ टका और पेट्रोबांग्ला को 7,164 करोड़ टका का भुगतान बाकी है।
पिछली गर्मियों में जब बिजली की अधिकतम मांग 17,200 मेगावाट तक पहुंची, तब औसतन केवल 15,500 मेगावाट की आपूर्ति हो सकी, जिससे 2,000-2,200 मेगावाट की कमी रह गई। इस बिजली की कमी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, उद्योगों और आम जनता पर पड़ रहा है। जब बिजली आपूर्ति में लगातार कमी हो रही है, तो घरेलू उत्पादन और नागरिक जीवन प्रभावित होते हैं। स्वतंत्र बिजली उत्पादकों, गैस सप्लायर्स और विदेशी कर्जदाताओं को बकाया भुगतान न कर पाने से यह संकट और भी गहरा होता जा रहा है।
पाकिस्तान से हाथ मिलाने का विपरीत असर – भारत के पड़ोसी देशों में सहयोग बढ़ाने की नीति के तहत यूनुस सरकार ने पाकिस्तान से हाथ मिलाया, लेकिन इसके परिणामस्वरूप आर्थिक स्थिति और भी बिगड़ गई। पाकिस्तान के साथ समझौते के बावजूद, बांग्लादेश अब अपनी मौजूदा आंतरिक समस्याओं, खासकर बिजली के क्षेत्र में, झेल रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि सरकार आर्थिक प्रबंधन में असमर्थ है और देश अंधकार में डूबने के कगार पर है।
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