
रिचर्ड मार्टिन ने कहा है कि अमेरिका के टैरिफ फैसले के खिलाफ भारत सख्ती से खड़ा हो गया है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि उनके पास कई ऑप्शन हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी टैरिफ आते ही भारत ने अमेरिका से हथियार सौदे रोक दिए, जो दिखाता है कि भारत के विकल्प पेंटागन से काफी आगे तक हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत व्यापार टैरिफ और 25 प्रतिशत रूसी तेल खरीदने के लिए जुर्माना लगाया है। यानि भारतीय सामानों पर अमेरिका का टैरिफ अब 50 प्रतिशत हो गया है। अगर 27 अगस्त कर रूसी तेल के लिए 25 प्रतिशत जुर्माना नहीं हटाया जाता है तो भारत वो इकलौता देश होगा, जिसपर सबसे ज्यादा अमेरिकी टैरिफ होगा। ट्रंप के टैरिफ का सीधा असर भारत के कपड़ा, फार्मा, स्टील और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर होगा। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को भारत ने अन्यायपूर्ण और एकतरफा बताया है। जबकि भारतीय प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि भारत अपने किसानों, मजदूरों और घरेलू उद्योग के लिए कोई समझौता नहीं करेगा, चाहे कोई भी कीमत क्यों ना चुकानी पड़े।
भारत के फैसले पर कई कुछ लोगों ने हैरानी जताई है कि आखिर कैसे भारत ने अमेरिका के आगे घुटने टेकने से इनकार कर दिया? एशिया टाइम्स में लिखते हुए नीदरलैंड के इंटरनेशनल रिलेशन और इंटरनेशनल ट्रेड एक्सपर्ट रिचर्ड मार्टिन ने लिखा है कि मोदी ने ऐसा फैसला किया है, क्योंकि ‘भारत जानता है कि वह अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर नहीं है और उसके पास कई वैकल्पिक रणनीतिक विकल्प मौजूद हैं। यही कारण है कि इस फैसले के तुरंत बाद भारत ने अमेरिका से खरीदे जाने वाले हथियारों के सौदे को रोक दिया जो ये संकेत है कि नई दिल्ली अब अपने पत्ते नये तरीके से खोलने के लिए तैयार है।
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