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सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले से तड़प रहा पाकिस्तान, अब UNSC में गिड़गिड़ाया, लागू करने की मांग


सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के भारत के फैसले ने पाकिस्तान की हालत खस्ता कर दी है। अब इस्लामाबाद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर गुहार लगाई है। पाकिस्तान ने UNSC से अनुरोध किया कि वह भारत के साथ चली आ रही सिंधु जल संधि को पूरी तरह लागू करने की मांग करे। भारत ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस जल संधि को निलंबित कर दिया था। 1960 में लागू होने के बाद यह पहली बार है जब किसी पक्ष ने इस संधि पर रोक लगाई है।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी मिशन के राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने गुरुवार को UNSC के अध्यक्ष जमाल फारेस अलरोवाई से मुलाकात की। इस दौरान अहमद ने सिंधु जल संधि के संबंध में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार का एक पत्र सौंपा।
पाकिस्तान ने संधि को लागू करने की मांग – संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी मिशन ने एक बयान में कहा, “सुरक्षा परिषद से आग्रह किया गया है कि वह इस इस चिंताजनक स्थिति का संज्ञान ले और भारत से सिंधु जल संधि को पूरी तरह से लागू करने, संधि के तहत अनिवार्य सभी सहयोग और डेटा शेयरिंग को बिना किसी देरी के फिर से शुरू करने, पानी को लेकर किसी भी तरह के दबाव या जोर-जबरदस्ती से बचने और पूरी ईमानदारी के साथ अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने की मांग करे।”
सिंधु जल संधि पाकिस्तान के लिए क्यों अहम? – सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है।
इसके थहत भारत से जाने वाली पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित किया गया है।
पाकिस्तान अपनी ज्यादातर खेती के लिए इन्हीं नदियों पर निर्भर है।
1960 में दोनों देशों के बीच इस संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, जो युद्धों और दशकों की दुश्मनी के बावजूद कायम रही है।
भारत ने क्यों स्थगित किया समझौता? – भारत ने 23 अप्रैल 2025 को घोषणा की कि वह सिंधु जल संधि को रोक रहा है। यह फैसला एक दिन पहले जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में क्रूर आतंकवादी हमले के जवाब में लिया गया था। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिसमें अधिकांश पर्यटक थे। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठन TRF ने ली थी। भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करते हुए कहा था कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते और पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ आतंकवाद का समर्थन करते हुए संधि की मूल भावना का उल्लंघन किया है।