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370 रुपये की बिरयानी विवाद: प्रणित मोरे-हिमांशु के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग का बड़ा एक्शन, डीजीपी को निर्देश


‘बिग बॉस 19’ में नजर आ चुके स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे के स्टैंड-अप शो में ‘370 रुपये की बिरयानी’ से जुड़ा विवाद अब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) तक पहुंच गया है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने हरियाणा के गुरुग्राम में आयोजित स्टैंड-अप कॉमेडी शो से जुड़े मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इस घटना को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स और वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं आयोग ने गुरुवार को कॉमेडियन प्रणीत मोरे और वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा को तलब किया।
आयोग ने इस मामले में सामने आए वीडियो और कथित घटनाक्रम पर गंभीर चिंता जताई है। राष्ट्रीय महिला आयोग का आरोप है कि गुरुग्राम में आयोजित एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो के दौरान किए गए कुछ कॉमेंट महिलाओं के प्रति यौन उत्पीड़न और उनकी सहमति के बिना संबंध बनाने जैसी हरकतों को सामान्य या महिमामंडित करने वाली प्रतीत होती हैं। एनसीडब्ल्यू का कहना है, ‘किसी भी ऐसे व्यवहार को सामान्य बनाना या उसका महिमामंडन करना, जो महिलाओं की सहमति, गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित करता है, समाज पर गलत प्रभाव डालता है और ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।’
आयोग ने सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी – खबरों और घटना के वीडियो का स्वतः संज्ञान लेते हुए आयोग ने कहा कि एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने हरियाणा के डीजीपी को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत, सख्त और समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने सात दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) भी मांगी है। इसमें यह जानकारी शामिल करने को कहा गया है कि क्या इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और अन्य संबंधित कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज की गई है या नहीं।
पूछा है कि इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई – इसके साथ ही आयोग ने यह भी पूछा है कि इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, वायरल वीडियो की जांच किस स्तर पर पहुंची है और आयोजन से जुड़े आयोजकों, कलाकारों के साथ ही वेन्यू मैनेजमेंट की क्या भूमिका रही है।
आयोग ने बयान में कही ये बातें – आयोग ने बयान में कहा, ‘राष्ट्रीय महिला आयोग ने हरियाणा के गुरुग्राम में आयोजित एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो से जुड़ी व्यापक मीडिया कवरेज और वायरल वीडियो का स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें एक महिला के प्रति यौन उत्पीड़न और उसकी सहमति के बिना संबंध बनाने जैसी हरकतों को महिमामंडित करने वाली टिप्पणियां सार्वजनिक रूप से की गईं और इस पर दर्शकों ने तालियां भी बजाईं।’
पूछा है कि हिंसक या आपत्तिजनक कंटेंट को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे – आयोग ने भारतीय न्याय संहिता और अन्य प्रावधानों के तहत FIR की स्थिति, संबंधित लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई, वायरल वीडियो की जांच और सर्टिफिकेशन के अलावा आयोजकों, कलाकारों व अन्य की भूमिका से जुड़े डीटेल मांगे हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग ने राज्य पुलिस से यह भी जानकारी मांगी है कि सार्वजनिक मनोरंजन मंचों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल महिलाओं के प्रति यौन उत्पीड़न, दबावपूर्ण व्यवहार या उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली हरकतों को बढ़ावा देने,महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार के अपमानजनक, हिंसक या आपत्तिजनक कंटेंट को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
दोनों को 22 जून को शाम 4 बजे NCW के सामने पेश होने का आदेश – इस मामले में आयोग ने प्रणीत मोरे और हिमांशु जांगड़ा को भी नोटिस जारी किया है। दोनों को 22 जून को शाम 4 बजे एनसीडब्ल्यू के सामने पेश होने के लिए तलब किया गया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब जांगड़ा ने शो के दौरान एक लड़की से अपनी मुलाकात का किस्सा सुनाया, जिसमें उन्होंने चिकन बिरयानी की एक प्लेट पर 370 रुपये खर्च किए थे। जांगड़ा ने बताया कि जब लड़की ने उनसे उसे घर छोड़ने के लिए कहा तो उन्होंने बिरयानी पर खर्च किए गए रुपयों के बदले उससे वसूली के लिए शारीरिक संबंध बनाने का प्रस्ताव रख दिया। मोरे को जांगड़ा के इस कॉमेंट पर हंसते हुए देखा गया।
आलोचना के बाद मोरे और जांगड़ा दोनों ने माफी मांगी – बाद में सोशल मीडिया पर भारी आलोचना के बाद मोरे और जांगड़ा दोनों ने माफी मांगी और जांगड़ा ने अपना इंस्टाग्राम खाता भी डीएक्टिवेट कर दिया। गुरुग्राम की एक कंपनी ने भी उनकी ‘370 रुपये बिरयानी’ वाले कॉमेंट को लेकर उन्हें नौकरी से निकाल दिया।
किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता – आयोग ने दोहराया है कि सहमति के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या अपमान को मनोरंजन के रूप में पेश करना कानून और संविधान के खिलाफ है। आयोग ने कहा कि वह इस मामले पर लगातार नजर बनाए रखेगा और संबंधित अधिकारियों से जल्द और उचित कार्रवाई की उम्मीद करता है।