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यूक्रेन के नये ड्रोन युद्ध से टूट रही रूसी सेना की कमर, एयर डिफेंस नाकाम, पुतिन बेबस, जेलेंस्की कहीं छीन ना लें क्रीमिया


यूक्रेन की सेना ने रूस के खिलाफ युद्ध में एक नया मोर्चा खोला है। यूक्रेन की सेना रूस के उस लॉजिस्टिक नेटवर्क को निशाना बना रही है जो रूसी सैनिकों तक सप्लाई पहुंचाता है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन में बने मध्यम-दूरी के ड्रोन का एक बढ़ता हुआ बेड़ा रूसी फ्रंट लाइन के काफी पीछे ईंधन के काफिलों, सैन्य ट्रकों, ट्रेनों, पुलों और सप्लाई डिपो पर हमले कर रहा है। इससे एक ऐसी स्थिति बन रही है जिसे यूक्रेनी अधिकारी ‘लॉजिस्टिकल लॉकडाउन’ कहते हैं। इसका मकसद रूस की हमला करने की क्षमता को कमजोर करना है।
मई महीने से यूक्रेन ने काफी तेजी से रूस पर हमले शुरू कर दिए हैं। कम से कम 150 से ज्यादा हमले रूस के ईंधन टैंकर्स, सैन्य ट्रकों और दूसरे लॉजिस्टिक नेटवर्क पर किए गये हैं। ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म OSINT का आकलन है कि यूक्रेन के ज्यादातर हमले दक्षिणी यूक्रेन और रूस के कब्जे वाले क्रीमिया में केंद्रित हैं। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि कई और हमले ऐसे भी हुए हैं जिनका रिकॉर्ड नहीं रखा गया है। यह कोशिश यूक्रेन की रणनीति में आए बदलाव को दिखाती है। मोर्चे पर मौजूद रूसी सैनिकों और हथियारों पर ही ध्यान केंद्रित करने के बजाय कीव अब उन बुनियादी ढांचों और सप्लाई रूट को निशाना बना रहा है जिनसे मॉस्को की युद्ध की कोशिशें चल रही हैं।
यूक्रेन ने कैसे ड्रोन युद्ध की परिभाषा बदल दी? – यूक्रेन नई पीढ़ी के ऐसे ड्रोन बना रहा है जिनकी जिनकी ऑपरेशनल रेंज 50 से 300 किलोमीटर के बीच है। FP-2 और बेहेमोथ जैसे सिस्टम युद्ध के मैदान से बहुत दूर के लक्ष्यों पर सटीक हमला कर रहे हैं। रूसी डिफेंस सिस्टम इन्हें ट्रैक करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बेहेमोथ ड्रोन लगभग 180 किमी/घंटा की गति से चलते हुए 70 किलोग्राम का वॉरहेड ले जा सकता है।
यूक्रेन की अनमैन्ड सिस्टम्स फोर्सेज ने सीएनएन वर्ल्ड को बताया कि पिछले एक साल में यूक्रेन के मध्यम दूरी के स्ट्राइक मिशन 28 गुना बढ़ गए हैं। उनके लक्ष्यों में रूसी लॉजिस्टिक्स पर हमले करना, हमले की कार्रवाई को रोकना और कब्ज़े वाले इलाकों में एयर-डिफेंस सिस्टम को कमजोर करना शामिल है ताकि और अंदर तक हमले करने के लिए रास्ते बनाए जा सकें। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने पहले कहा था कि फरवरी के बाद से 20 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर हमले चार गुना बढ़ गए हैं और उन्होंने लंबी दूरी के ड्रोन हमलों को एक अहम सैन्य प्राथमिकता बताया था।
फ्रांस के ओपन-सोर्स एनालिस्ट क्लेमेंट मोलिन ने कहा कि यूक्रेन ने रूसी सेना की लाइनों के पीछे 300 किलोमीटर तक युद्ध का दायरा बढ़ा दिया है और वे फ्यूल डिपो, मिलिट्री ट्रांसपोर्ट रूट और सप्लाई इंफ़्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहे हैं। खबरों के मुताबिक जनवरी से अब तक कम से कम 20 ट्रेनों को निशाना बनाया गया है जिनमें से कई में फ्यूल ले जाया जा रहा था।
क्रीमिया कहीं रूस के हाथ से ना निकल जाए? – क्रीमिया पहले यूक्रेन का हिस्सा था जिसपर 2014 में रूस ने कब्जा कर लिया था। अब यूक्रेन इसे वापस छीनने की कोशिश कर रहा है। यूक्रेन के ज्यादातर ड्रोन हमले क्रीमिया को निशाना बनाकर हो रहे हैं। यूक्रेन ने क्रीमिया को रूस से जोड़ने वाले सड़कों और पुलों के नेटवर्क पर हमले शुरू किए हैं। यूक्रेनी ड्रोन यूनिट्स ने बार-बार चोन्हार पुल को निशाना बनाया है जो क्रीमिया में सबसे महत्वपूर्ण आपूर्ति क्रॉसिंगों में से एक है। रूसी-स्थापित अधिकारियों ने क्षति और बार-बार यातायात व्यवधान को स्वीकार किया है जबकि पोंटून क्रॉसिंग जैसे अस्थायी विकल्प तैनात किए गए हैं।
आलम ये है कि यूक्रेनी ड्रोन कमांडर रॉबर्ट ब्रोवडी ने बताया कि हमलों के दो हफ्तों के भीतर ही चोनहर रूट पर माल ढुलाई में 70 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। इन हमलों के बाद जब रूस ने सैन्य सप्लाई के लिए दूसरे रास्तों का इस्तेमाल शुरू किया तो यूक्रेनी सेना ने उन रास्तों पर भी हमले करने शुरू कर दिए। रूस को पूर्वी यूक्रेन के कब्जे वाले इलाकों से जोड़ने वाले कुछ हाईवे इतने असुरक्षित हो गए हैं कि रूस समर्थित अधिकारियों ने ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर बार-बार हो रहे हमलों का हवाला देते हुए वहां ट्रैफिक पर रोक लगा दी है।
MSN की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन ने हाल के महीनों में कुछ इलाकों पर दोबारा कब्जा कर लिया है। जबकि रूसी सेना को इतनी तेजी से नुकसान हुआ है कि कुछ जानकारों का कहना है कि यह नुकसान उनकी भरपाई करने की क्षमता से कहीं ज्यादा है। जानकारों का तर्क है कि लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर लगातार दबाव के कारण मॉस्को के लिए हमले की रफ्तार बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।