
भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है लेकिन फिर भी हमारे इंटरनेट की डोर सात समंदर पार अमेरिका के हाथों में है। इस बात को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने वैश्विक इंटरनेट संस्था आईकैन (ICANN) से भारत में ही मुख्य रूट सर्वर स्थापित करने की मांग की है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन का कहना है कि इतनी बड़ी आबादी और इंटरनेट यूजर्स की सुरक्षा के लिए भारत के पास अपना रूट सर्वर जरूर होना चाहिए। इससे भारत की डिजिटल संप्रभुता और इंटरनेट सुरक्षा को अभेद्य बनाया जा सकता है।
रूट सर्वर क्या हैं? – रूट सर्वर इंटरनेट का वे केंद्र होते हैं जो यूजर्स को वेबसाइटों से जोड़ते हैं।
फिलहाल आप जो भी वेबसाइट खोलते हैं या ईमेल भेजते हैं, तो उसकी रिक्वेस्ट पहले अमेरिका में स्थित रूट सर्वर्स के पास जाती है।
ये सर्वर एड्रेस ढूंढकर आपको वेबसाइट तक पहुंचाते हैं। – फिलहाल ICANN के पास सिंगापुर, यूरोप, अमेरिका, मिस्र और केन्या में ऐसे सर्वर हैं।
भारत सरकार और ICANN के बीच इसे लेकर बातचीत चल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत को सभी 13 मुख्य रूट सर्वर्स को मिरर करने वाले 18 सर्वर्स का एक पूरा क्लस्टर मिल सकता है। हालांकि, इसे पूरा करना एक लंबी और मुश्किल प्रक्रिया है।
इंटरनेट के लिए विदेशों पर निर्भरता होगी खत्म – मोदी सरकार की इस मांग के चलते देश इंटरनेट के मामले में विदेशी ढांचे पर निर्भर नहीं रहेगा।
इसका एक बड़ा फायदा यह होगा कि किसी भी बड़े साइबर या मैलवेयर हमले की स्थिति में तुंरत कार्रवाई की जा सकेगी।
इसके अलावा इस तरह के खतरों को इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के गेटवे पर ही रोका जा सकेगा (REF.)
पूरी दुनिया में फैला हो इंटरनेट का ढांचा – रिपोर्ट्स के मुताबिक सचिव कृष्णन ने इस बात पर बहुत जोर दिया है कि पूरी दुनिया में इंटरनेट का बुनियादी ढ़ांचा समान रूप से फैला हो। भारत को विश्वास है कि भारत में रूट सर्वर आने से न सिर्फ क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाने में मदद मिलेगी बल्कि इससे देश में तकनीकी सुधार भी होंगे। इससे भारत के इंटरनेट इकोसिस्टम में निवेश का रास्ता भी खुलेगा। इसके अलावा यह भारत को डिजिटल तौर पर सुरक्षित और आत्मनिर्भर भी बनाएगा।
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