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‘परमाणु बम ही विश्व युद्ध से बचा सकता है’, रूस का न्यूक्लियर हथियारों पर बड़ा बयान, ट्रंप की बढ़ेगी चिंता!


रूस की ओर से परमाणु हथियारों के विस्तार के पक्ष में बयान आया है। कई देशों के बीच परमाणु हथियारों की होड़ की आशंकाओं के बीच क्रेमलिन का कहना है कि न्यूक्यिलर वेपन ही दुनिया को वैश्विक युद्ध में जाने से रोक सकता है। क्रेमलिन प्रवक्ता ने बुधवार को अपने बयान में परमाणु हथियारों को एक और विश्व युद्ध के खतरे से बचाने वाला एकमात्र उपाय बताया है। रूस का यह रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए चिंता का सबब बन सकता है।
मॉस्को में एक विदेश नीति मंच पर बोलते हुए, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है। आज सच यह है कि हमारे पास इस दुनिया में परमाणु प्रतिरोध (न्यूक्लियर डिटेरेंस) के अलावा कुछ नहीं बचा है। परमाणु हथियार ही एकमात्र चीज है, जो दुनिया को वैश्विक युद्ध से बचा सकती है।
पुतिन कर चुके परमाणु हथियारों का जिक्र – दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि नई तकनीक से नए तरह के गैर-परमाणु हथियार सामने आएंगे। हो सकता है कि वे विनाशकारी क्षमता में परमाणु हथियारों की बराबरी कर लें। अमेरिका की ओर से चीन के बढ़ते परमाणु जखीरे और ईरान के बम बनाने की संभावना पर बयान आते रहे हैं। हालांकि क्रेमलिन प्रवक्ता ने इस दौरान किसी देश का नाम नहीं लिया।
यूक्रेन के साथ चार साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बार-बार परमाणु हथियारों का जिक्र किया है। यूरोप और अमेरिका ने उन पर गैर-जिम्मेदाराना तरीके से परमाणु धमकी देने का आरोप लगाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक नई संधि पर जोर दे रहे हैं, जिसमें चीन भी शामिल हो।
हालिया समय में वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हुई है। मौजूदा समय दुनिया में परमाणु प्रतिरोध के अलावा कुछ नहीं बचा है। जैसे-जैसे तकनीक विकसित हो रही है, यह साफ है कि नए तरह के गैर-परमाणु हथियार सामने आएंगे। हो सकता है कि वे विनाशकारी क्षमता में परमाणु हथियारों की बराबरी कर लें।क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव
चीन ने खारिज किया प्रस्ताव – चीन ने सार्वजनिक रूप से इसे खारिज किया है। वहीं मॉस्को का कहना है कि अगर चीन को किसी नए समझौते में शामिल किया जाता है तो वाशिंगटन के परमाणु सहयोगी देशों- ब्रिटेन और फ्रांस को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए। रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की आखिरी संधि ‘न्यू स्टार्ट’ इस साल फरवरी में खत्म होने से परमाणु हथियारों पर नई बहस छिड़ी है।
न्यू स्टार्ट के खत्म होने से दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु ताकतों (रूस और अमेरिका) पर लगी पाबंदियां हट गईं। अब तक दोनों पक्षों ने इस समझौते को रिन्यू करने या बदलने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। हालांकि दोनों पक्ष उच्च-स्तरीय सैन्य बातचीत फिर से शुरू करने पर सहमत हुए थे।
रूस-अमेरिका में कोई संधि नहीं – ‘न्यू स्टार्ट’ के खत्म होने से दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करने वाली कोई संधि लागू नहीं है। 2010 में हस्ताक्षरित यह संधि शीत युद्ध के दौर के हथियारों पर नियंत्रण के समझौतों की श्रृंखला में आखिरी थी, जिसने मॉस्को और वाशिंगटन को 1,550 तैनात परमाणु वॉरहेड तक सीमित किया था। दोनों ही देश समझौते का पालन ना करने का आरोप लगाते रहे थे।