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ट्रंप की चेतावनी दरकिनार, चीनी दिग्गज अलीबाबा ने कॉपी किया Claude AI, एंथ्रोपिक के गंभीर आरोप


AI की दुनिया में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल अमेरिका की दिग्गज AI कंपनी एंथ्रोपिक ने चीनी टेक दिग्गज अलीबाबा पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अलीबाबा ने उनके एडवांस AI मॉडल Claude की कॉपी बना ली है। इस मामले और तूल तब पकड़ लिया जब सामने आया कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा चीनी कंपनियों को दी गई सख्त चेतावनी के बावजूद ऐसा हुआ है। इसके बाद से अंतरराष्ट्रीय टेक-पॉलिसी और टेक जगत में हड़कंप सा मच गया है। एंथ्रोपिक का आरोप है कि इसके लिए चीनी कंपनी अलीबाबा ने बहुत ही होशियारी से रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिए एक चोरी को अंजाम दिया है
कैसे बना ली दिग्गज Claude AI की कॉपी? – एंथ्रोपिक की ओर से इस संबंध में एक पत्र अमेरिकी सीनेटरों को भेजा गया था। इसमें Claude पर हुए हमले की तारीखों का जिक्र हुआ है, जो कि 22 अप्रैल से 5 जून के बीच बताया जा रहा है।
एंथ्रोपिक का आरोप है कि अलाबाबा की एआई लैब अलीबाबा क्वेन से जुड़े ऑपरेटरों ने पहले 25000 फर्जी अकाउंट बनाए।
इन फर्जी खातों से Claude के साथ 2.8 करोड़ से ज्यादा बार डेटा एक्सचेंज किया गया।
इसका मकसद बिना रिसर्ट या भारी खर्चे के Claude की क्षमताओं को कॉपी करना था।(REF.)
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ट्रंप की धमकी और अलीबाबा पर कार्रवाई की मांग
इस घटना के तूल पकड़ने का बड़ा कारण है कि ट्रंप ने चीन द्वारा की जा रही AI चोरी की निंदा की थी।
इस पर ट्रंप ने बकायदा चेतावनी भी दी थी लेकिन इसके बावजूद बताया जा रहा है कि अलीबाबा ने इस चोरी को अंजाम दिया।
एंथ्रोपिक की मांग है कि ऐसी चीनी टेक कंपनियों के खिलाफ कड़े कानून बनाए जाएं।
उनकी यह भी मांग है कि चीन पर चिप निर्यात के कड़े प्रतिबंध हों और चीनी AI लैब्स के अमेरिकी AI के इस्तेमाल पर रोक लगे।
चीन के लिए ‘साइबर परमाणु हथियार’ जैसी है अमेरिकी तकनीक – दरअसल चीन अब तक के सबसे शक्तिशाली बताए जाने वाले Mythos की बराबरी करने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि चीन की एक बड़ी साइबर सुरक्षा कंपनी के संस्थापक झोउ होंगयी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में Mythos को एक साइबर परमाणु हथियार तक बताया है।
उन्होंनें इस बात को भी माना कि साइबर सुरक्षा से जुड़ी खामियां ढूंढने में अमेरिका फिलहाल चीन से बहुत आगे है।
एक्सपर्ट्स का दावा है कि अगर चीन AI की चोरी करने में कामियाब रहा, तो अमेरिकी सरकार और कंपनियों के खिलाफ बड़े साइबर हमले हो सकते हैं।