Saturday , October 3 2026 5:14 PM
Home / Business & Tech / G-20 में भारत की दोटूक, WTO के नियमों से ही चलेगा व्यापार, अमेरिका ने उठाया था मुद्दा

G-20 में भारत की दोटूक, WTO के नियमों से ही चलेगा व्यापार, अमेरिका ने उठाया था मुद्दा


वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका में G-20 के वाणिज्य एवं व्यापार मंत्रियों के सम्मेलन में यह आरोप खारिज किया कि भारत में कुछ सेक्टरों में जरूरत से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है, जिससे किसी दूसरे देश के उद्योगों के हितों को नुकसान पहुंच सकता हो। गोयल ने कहा कि भारत अपने आप में विशाल देश है और अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ यह वैश्विक स्तर पर आवश्यकताओं की पूर्ति में भी मदद करता है। उन्होंने कहा कि उत्पादन और सप्लाई चेन का दायरा बढ़ाना एक वाजिब मकसद है, लेकिन इसकी आड़ लेकर WTO के नियमों से बाहर के कदम नहीं उठाए जा सकते हैं और विकासशील देशों पर बोझ नहीं डाला जा सकता है।
मसला क्या है? – गोयल की यह बात इस मायने में अहम है कि अमेरिका की अगुवाई में G-20 में यह मुद्दा उठाया गया। साथ ही अलग से अमेरिका अपने सेक्शन 301 के तहत यह जांच कर रहा है कि भारत सहित 60 देशों में स्टील, टेक्सटाइल्स, ऑटोमोबाइल्स, केमिकल्स सहित कुछ सेक्टरों में ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता होने से अमेरिकी हितों को नुकसान हो रहा है या नहीं।
भारत की दलील – गोयल ने कहा, ‘G-20 प्रेसिडेंसी ने जिन सेक्टरों को चिन्हित किया है, उनमें भारत के पास स्ट्रक्चरल एक्सेस कैपेसिटी नही है।’ पीयूष गोयल ने कहा कि कई देशों ने यह चिंता जताई है कि कुछ देशों में अपने हितों को बढ़ावा देने की हरकतों से डंपिंग और कम दाम पर माल दूसरे देशों में उतारने की स्थिति बन सकती है और भारत की भी ऐसी ही चिंता है।
चीन करता है डंपिंग – अमेरिका के टैरिफ दबाव और भारत समेत 60 देशों में ‘ओवरकैपेसिटी’ की जांच के बीच गोयल ने G-20 बैठक में भारत पर लगे आरोप को खारिज किया। स्टील, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल और केमिकल जैसे सेक्टरों में अमेरिका को डंपिंग का डर है। मगर दुनिया जानती है कि सबसे ज्यादा डंपिंग चीन करता है, जिससे भारत भी परेशान है। गोयल का बयान इस लिहाज से भी अहम है क्योंकि भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील में यह मुद्दा दबाव का आधार न बन पाए।