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40 के बाद महिलाओं के लिए नॉर्मल प्रेग्नेंसी से बेहतर है IVF-Nari


मां बनना हर औरत के लिए एक सुखद अहसास होता है इसलिए शादी के बाद हर महिला फैमिली प्लानिंग करने लगती हैं। इस फीलिंग को वहीं औरत समझ सकती है जो मां बनने वाली हो या फिर मां बन चुकी हो। मगर करियर की अंधी दौड, देरी से शादी, शारीरिक विकार या देरी से फैमिली प्लानिंग से महिलाओं का एक बड़ा वर्ग संतान प्राप्ति से दूर रह जाता है। 35 साल की उम्र के बाद नैचुरल तरीके से मां बनना मुश्किल हो जाता है। बच्चा ना होने के कारण परिवार में दूरियां बढ़ने लगती है। पति-पत्नी में टकरार और बच्चा ना होने के कारण कुछ महिलाएं डिप्रैशन का शिकार तक हो जाता है। एेसे में उम्रदराज महिलाओं के लिए आईवीएफ अधिक लाभदायक है।
अगर आप भी आईवीएफ करवाने का सोच रही हैं तो उसके ट्रीटमेंट के बारे में जानना बेहद जरूरी है। यह तकनीक एकमात्र उपाय है जो आपकी जिंदगी में खुशियों ला सकती हैं।

क्या है आईवीएफ प्रक्रिया

आईवीएफ प्रक्रिया को टेस्ट टयूब बेबी के नाम से भी जाना जाता है। यह उन कपल्स के लिए बेस्ट है जो पेरेंट्स बनने में असमर्थ हैं। आईवीएफ के दौरान महिलाओं को दवाइयों और इंजैक्शन देकर उनके शरीर में सामान्य से ज्यादा अंधिक अंडे बनाए जाते हैं। फिर अच्छी क्वालिटी के अंडों को सूई की सहायता से महिला के शरीर से बाहर निकालकर पुरूष के शुक्राणुओं से लेब में अण्डों को निषेचित किया जाता है। आईवीएफ प्रक्रिया के तहत बने भ्रूणों का चयन कर अच्छे भ्रूण को महिला के गर्भाशय में इंजेक्ट किया जाता है।
माहवारी बंद होने के बाद क्या करें

बड़ी उम्र में कुछ महिलाओं की माहवारी बंद हो जाती है। इसके बंद होने पर प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण करने की संभावनाएं बहुत हद तक खत्म हो जाती हैं। मगर आईवीएफ तकनीक से बंद माहवारी में भी मातृत्व को प्राप्त किया जा सकता है। पीरियड को फिर से शुरू करने के लिए दवाइयों के जरिए एक बार फिर से शुरू किया जाता है या फिर डोनर एग/ आईवीएफ का सहारा लिया जा सकता है।