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चीन की अनसुनी, फिलिपीन सी में अमेरिका के USS Theodore Roosevelt और USS Nimitz ने किया अभ्यास


चीन की अनसुनी, फिलिपीन सी में अमेरिका के USS Theodore Roosevelt और USS Nimitz ने किया अभ्याससाउथ चाइना सी में अमेरिका और चीन एक-दूसरे के सामने अपनी ताकत का प्रदर्शन करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। कोरोना वायरस से जूझ रहे दोनों देशों का ध्यान अभी भी यहां लगा हुआ है। ताजा वाकये में अमेरिका के दो कैरियर्स ने फिलिपीन सी में मंगलवार को जॉइंट ड्रिल्स कीं। जानकारों का मानना है कि यह चीन के साउथ चाइना सी में एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) लागू करने की खबरों के बाद शक्ति प्रदर्शन के लिए किया गया।
थिओडोर, निमित्ज ने किया अभ्यास
अमेरिका के USS थिओडोर रूजवेल्ट और USS निमित्ज स्ट्राइक ग्रुप्स ने इंटरनैशनल वॉटर पर ऑपरेशन शुरू किया और करीब से दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स के ऑपरेट करने की क्षमता का प्रदर्शन किया। वहीं, एक और कैरियर स्ट्राइक ग्रुप USS रॉनल्ड रीगन फिलिपीन सी में तैनात था। पश्चिम फिलिपीन सी साउथ चाइना सी में आता है जिसे लेकर चीन और अमेरिका आमने-सामने हैं। फिलिपीन सी फिलिपीन के पूर्वी तट, ताइवान, जापान से लेकर मारियाना टापू में गुआम और कैरोलाइन टापू में पलाऊ तक फैला है।
चीन की अमेरिका को चेतावनी
गौरतलब है कि चीन ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि जापान जैसे देशों में अपनी सैन्य तैनाती न करे। चीन ने यहां तक दावा किया है कि अगर अमेरिका इस दिशा में आगे बढ़ता है तो चीन भी हर जवाब के लिए तैयार रहेगा। दरअसल, हाल ही में जापान और अमेरिका ने साउथ चाइना सी में संयुक्त ड्रिल भी की है। हालांकि, जापान अमेरिका के ऐंटी-मिसाइल सिस्टम को तैनात करने से फिलहाल रोक चुका है।
ट्रंप के कार्यकाल में बढ़ी सक्रियता
खास बात यह है कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में फ्रीडम ऑफ नैविगेशन के लिए सिर्फ 4 बार अमेरिका ने ऑपरेशन्स किए लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से 22 बार ऐसा किया जा चुका है। रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि दोनों देशों की सेनाओं को संवाद बढ़ाना चाहिए ताकि गलतफहमी से बचा जा सके। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि सैन्य संबंध खराब होने से खतरानक घटना, विवाद या संकट की आशंका बढ़ सकती है।
जापान ने रोकी थी Aegis Ashore की तैनाती
बता दें कि जापान ने कुछ दिन पहले ही अमेरिका के अरबों डॉलर के मिसाइल डिफेंस सिस्टम Aegis Ashore को नहीं लेने का फैसला किया था। रक्षा मंत्री तारो कोनो ने बताया था कि उसके डिजाइन को सही करने की जरूरत थी क्योंकि रॉकेट के मलबे से आसपास के लोगों को खतरा हो सकता था। यह काम काफी महंगा, बड़ा और गैरजरूरी समझकर Aegis का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया गया। जापान के अकीता और यमागुची में तैनात किए जाने वाले Aegis की मदद से बैलिस्टिक मिसाइल्स पर नजर रखी जा सकती थी।