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भारत-चीन सीमा विवाद पर बोले ट्रंप, कहा- इससे चीनी आक्रामकता के पैटर्न की हुई पुष्टि


भारत-चीन सीमा विवाद मामले में अमेरिका ने खुले तौर पर भारत का समर्थन किया है। माइक पोम्पियो ने तो चीनी आक्रामकता का जवाब देने के लिए एशिया में न सिर्फ अपनी सेना की तैनाती बढ़ाने की चेतावनी दी है, बल्कि वहां कई सीनेटरों ने भारत के पक्ष में बिल प्रस्तुत किया है। इसी कड़ी में गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से सीमा विवाद को लेकर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर निशाना साधा।
सीमा विवाद से चीनी आक्रामकता के पैटर्न की हुई पुष्टि
उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा पर चीन का आक्रामक रुख दुनिया के अन्य हिस्सों में चीनी आक्रामकता के पैटर्न के साथ फिट बैठता है। ये कार्रवाई केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की वास्तविक प्रकृति की पुष्टि करती है। वहीं, वाइट हाउस ने एक बयान जारी कर कहा कि भारत चीन तनाव पर हम करीबी नजर रखे हुए हैं। भारत और चीन दोनों ने ही इस स्थिति को शांत करने के लिए इच्छा व्यक्त की है। हम मौजूदा स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करते हैं।
चीनी ऐप बैन किए जाने का समर्थन
भारत के 59 चीनी ऐप्स पर बैन लगाने के कदम का स्वागत करते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ ने चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी को ‘निर्दयी’ बता डाला। पॉम्पिओ ने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की निर्दयता का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उन्होंने कहा, ‘हम कुछ मोबाइल ऐप्स पर बैन लगाने के भारत के कदम का स्वागत करते हैं।’
निक्की हेली ने भी ऐप बैन का किया स्वागत
पॉम्पिओ ने इन ऐप्स को CCP के सर्विलांस का अंग बताया और कहा कि भारत के ऐप्स के सफाए के कदम से भारत की संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा जैसा भारत की सरकार ने खुद भी कहा है। वहीं, यूएन में अमेरिका की स्थायी प्रतिनिधि रहीं निक्की हेली ने भी चीनी ऐप्स को बैन किए जाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत में चीनी फर्मों के स्वामित्व वाले 59 ऐप्स को बैन किया जाना अच्छा है। भारत ने दिखाया है कि वह चीनी आक्रामकता से पीछे नहीं हटेगा।
भारत के साथ लद्दाख में एलएसी पर 15 जुलाई के बाद से ही तनाव चरम पर है। गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प और ड्रैगन के विश्वासघाती रवैये को देखते हुए भारत कोई रिस्क नहीं लेना चाहता। इस कारण न केवल सीमा पर जवानों की तैनाती बढ़ा दी गई है। बल्कि, हिंद महासागर में भारतीय नौसेना ने पेट्रोलिंग तेज की है। चीन के जल, थल और नभ में किए गए किसी भी हिमाकत का जवाब देने के लिए भारतीय सशस्त्र बल पूरी तरह तैयार हैं।
पैंगोंग त्सो झील इलाके में तनाव बरकरार
चीन गलवान और गोगरा हॉट स्प्रिंग इलाके से फौज हटाने के लिए तो तैयार हो गया है, लेकिन पैंगोंग त्सो झील इलाके में उसके इरादे अब भी नेक नहीं लग रहे हैं। पैंगोंग झील इलाके को लेकर जो टकराव है उस पर अभी स्थिति साफ होती नहीं दिख रही है। यहां पर पीएलए (चीनी) सैनिकों ने बड़ी संख्या में बंकर बना लिए हैं और इस इलाके की किलेबंदी सी कर दी है। उसके सैनिकों ने फिंगर- 4 से 8 तक अपना कब्जा जमाने के बाद यहां सबसे ऊंची चोटी पर भी अपना कब्जा जमाया हुआ है। माना जा रहा है कि यह तनाव अभी कई महीनों तक चल सकता है।
जापान के साथ भी तनाव चरम पर
जापान के साथ भी चीन पूर्वी चीन सागर में द्वीपों के स्वामित्व को लेकर उलझा हुआ है। दोनों देश इन निर्जन द्वीपों पर अपना दावा करते हैं। जिन्हें जापान में सेनकाकु और चीन में डियाओस के नाम से जाना जाता है। इन द्वीपों का प्रशासन 1972 से जापान के हाथों में है। हाल में ही जापान ने चीनी सेना की एक पनडुब्बी और एक स्ट्रैटजिक बॉम्बर एयरक्राफ्ट को अपनी सीमा से बाहर भगााया था।
हिंद महासागर में जापान सक्रिय
चीन से खतरे को देखते हुए जापान ने न केवल पूर्वी चीन सागर और प्रशांत महासागर बल्कि हिंद महासागर में भी अपनी ऑपरेशनल गतिविधियों को बढ़ाया है। जापानी की नौसेना भारत के साथ मिलकर युद्धाभ्यास कर रही हैं। इसका मकसद न केवल आपसी तालमेल को बढ़ाना है बल्कि हिंद महासागर से चीन को अलग-थलग करना भी है। वहीं, इसमें भारत और जापान का अमेरिका खुलकर साथ दे रहा है।
चीन के खिलाफ खुलकर आया ऑस्ट्रेलिया
चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच जारी विवाद अब और गहराता दिखाई दे रहा है। चीनी सरकार की ओर से लगातार किए जा रहे आर्थिक घेराबंदी और साइबर हमलों से परेशान ऑस्ट्रेलिया ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी सेना को और मजबूत करने का फैसला किया है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिशन ने सेना के लिए नए हथियारों के खरीद की भी घोषणा की है। इसके अलावा एशिया प्रशांत क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया कई महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी सेना की तैनाती बढ़ाएगा।
सुपर हॉर्नेट बेड़े को मजबूत करेगा ऑस्ट्रेलिया
पीएम मॉरिशन ने बुधवार को घोषणा करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया अपने सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट्स के बेड़े को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी के एंटी शिप मिसाइलों की खरीद सहित देश की रक्षा रणनीति में बदलाव किया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया ने ऐसा कदम मित्र देशों, सहयोगियों और मुख्य भूमि की रक्षा के लिए उठाया है। ऑस्ट्रेलिया इस जमीन से लॉन्च की जा सकने वाली लॉन्ग रेंज सरफेस टू सरफेस मिसाइल और सरफेस टू एयर मिसाइल के खरीद के बारे में भी विचार कर रहा है। इसके अलावा हाइपरसोनिक मिसाइलों के खरीद को लेकर भी अमेरिका से बात करने की तैयारी है।
अमेरिका भी चीन के खिलाफ, एशिया में बढ़ाएगा सैनिकों की तैनाती
चीन के खिलाफ अमेरिका एशिया में अपनी फौज को बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। चीन के आक्रामक रवैये की आलोचना करते हुए यूएस कहा कि हम भारत और अपने मित्र देशों को चीन से खतरे के मद्देनजर अपने सैनिकों की तैनाती की समीक्षा कर रहे हैं। चीन को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए अमेरिका ने कहा कि जरूरत पड़ी तो अमेरिकी सेना चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से मुकाबला करने को तैयार है।
अमेरिका यूं ही नहीं भेज रहा सेना
अमेरिका के पास दुनिया की सबसे आधुनिक सेना और हथियार हैं। दुनियाभर के देशों की सैन्य ताकत का आंकलन करने वाली ग्लोबल फायर पॉवर इंडेक्स के अनुसार 137 देशों की सूची में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के मामले में अमेरिका दुनिया के बाकी देशों से बहुत आगे है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका के दुनिया में 800 सैन्य ठिकाने हैं। इनमें 100 से ज्यादा खाड़ी देशों में हैं। जहां 60 से 70 हजार जवान तैनात हैं।
एशिया में किन-किन देशों को चीन से खतरा
एशिया में चीन की विस्तारवादी नीतियों से भारत को सबसे ज्यादा खतरा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण लद्दाख में चीनी फौज के जमावड़े से मिल रहा है। इसके अलावा चीन और जापान में भी पूर्वी चीन सागर में स्थित द्वीपों को लेकर तनाव चरम पर है। हाल में ही जापान ने एक चीनी पनडुब्बी को अपने जलक्षेत्र से खदेड़ा था। चीन कई बार ताइवान पर भी खुलेआम सेना के प्रयोग की धमकी दे चुका है। इन दिनों चीनी फाइटर जेट्स ने भी कई बार ताइवान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है। वहीं चीन का फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया के साथ भी विवाद है।
अमेरिका में भी टिक-टॉक बैन की मांग
वहीं, अमेरिका के सांसदों ने अमेरिकी सरकार से भी टिकटॉक बैन पर विचार करने की अपील की है। उनका कहना है कि छोटे-छोटे वीडियो शेयर करने वाले ऐप किसी भी देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर जॉन कॉर्निन ने द वॉशिंगटन पोस्ट में छपी एक खबर को टैग करते हुए अपने ट्वीट में कहा, ‘खूनी झड़प के बाद भारत ने टिकटॉक और दर्जनों चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया।’ वहीं रिपब्लिकन पार्टी के ही सांसद रिक क्रोफोर्ड ने कहा, ‘टिकटॉक को जाना ही चाहिए और इसे तो पहले ही प्रतिबंधित कर देना चाहिए था।