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‘चीन कभी नहीं बन पाएगा सुपरपावर’ सच्चाई से से परे है जिनपिंग का अमेरिका को गिरती ताकत कहना, जानें हकीकत


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चीन का दौरा किया है। ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठक में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इशारों-इशारों में अमेरिका को ‘गिरती हुई शक्ति’ कहा। यह पहली बार नहीं है, जब जिनपिंग ने अमेरिका को कमजोर होते देश की तरह पेश किया है। हाल के वर्षों में जिनपिंग ने बार-बार अमेरिका को ऐसे देश के तौर पर दुनिया को दिखाना चाहा है, जो सुपरपावर के तौर पर अपनी चमक खो रहा है। ऐसे में सवाल है कि क्या सचमुच अमेरिका अब महाशक्ति नहीं रहा है या फिर बहुत जल्द नहीं रहेगा।
यूरेशियन टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका के जल्द ही पतन होने की कहानियां बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही हैं। सत्ता के मुख्य पैमानों- आर्थिक आकार, सैन्य क्षमता, तकनीकी बढ़त, गठबंधन, मुद्रा का दबदबा और सॉफ्ट पावर का विश्लेषण करें तो अमेरिका बेहद मजबूत है। आंकड़े दिखाते हैं कि अमेरिका पतन की ओर नहीं है। वह चार से पांच दशकों तक दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति बना रहेगा।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था चीन से बहुत आगे – किसी देश की ताकत का एक बड़ा पैमाना उसका आर्थिक आकार है। आर्थिक ताकत के मामले में अमेरिका चीन से काफी आगे है। IMF के 2026 के अनुमानों के अनुसार, अमेरिकी अर्थव्यवस्था 32.38 ट्रिलियन डॉलर की है, जबकि चीन की अर्थव्यवस्था 20.85 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है। यानी अमेरिका की अर्थव्यवस्था चीन से 1.54 गुना बड़ी है।
चीन निकट भविष्य में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पीछे नहीं छोड़ पाएगा। एक दशक पहले कई थिंक टैंक यह अनुमान लगा रहे थे कि 2030 तक चीनी अर्थव्यवस्था अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आगे निकल जाएगी। ये सारे अनुमान गलत साबित हुए हैं। अब कई अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि चीन 2060 या उसके भी बाद अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आगे निकल पाएगा।
दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का अंतर और भी ज्यादा बढ़ सकता है। जो कोई भी यह मानता है कि अमेरिका कमजोर हो रहा है, उसे अपना मानसिक परीक्षण करवाना चाहिए। सिंगापुर के पूर्व शीर्ष राजनयिक किशोर महबूबानी
‘चीन कभी आगे नहीं निकल सकेगा’ – लंदन स्थित कैपिटल इकोनॉमिक्स के अनुसार, प्रोडक्टिविटी ग्रोथ में कमी और वर्कफोर्स के सिकुड़ने की वजह से चीन कभी भी अमेरिका से आगे नहीं निकल पाएगा। कंसल्टेंसी फर्म कैपिटल इकोनॉमिक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि समय के साथ अमेरिका के मुकाबले चीन का आर्थिक दबदबा लगातार नहीं बढ़ेगा।
साल 2030 तक चीन का वर्कफोर्स हर साल 0.5 प्रतिशत से ज्यादा कम हो जाएगा। वहीं अगले 30 सालों में अमेरिका का वर्कफोर्स बढ़ेगा, जिसे ज्यादा जन्म दर और इमिग्रेशन से मदद मिलेगी। चीन की दोहरे अंकों वाली विकास दर ने काफी उम्मीद जगाई थी लेकिन अब वह मौजूद नहीं है और उसके वापस आने की संभावना कम है।
चीन के सामने मुश्किल – चीन की आबादी बीते चार सालों से लगातार घट रही है और जन्म दर ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। घटती आबादी का चीन पर आर्थिक और सामाजिक असर पड़ेगा। चीन को आने वाले वर्षों में घटती आबादी, सिकुड़ता कार्यबल और ठहरी हुई आर्थिक वृद्धि का सामना करना पड़ेगा।
दूसरी ओर अमेरिका की आबादी बढ़ती रहेगी, जिसका मुख्य कारण वहां की स्वस्थ जन्म दरें और आप्रवासन है। अमेरिका की आबादी 2020 के 33 करोड़ से बढ़कर 2030 में 34.9 करोड़ और 2050 में 37 करोड़ तक पहुंच जाएगी। यह आबादी इस बात को सुनिश्चित करेगी कि देश आर्थिक विकास की राह पर बढ़ता रहे।