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81 साल पहले दूसरे विश्वयुद्ध में डुबोई गई पनडुब्बी ने अब बढ़ाया समंदर का ‘पारा’, 1,867 कंटेनरों से निकल रही बेहद अजीब चीज


यूरोप के ठंडे देश नॉर्वे के फेडजे (Fedje) द्वीप के पास समुद्र की तलहटी में 81 सालों से दूसरे विश्व युद्ध की एक बहुत नाज़ुक निशानी मौजूद है। लगभग 150 मीटर की गहराई में U-864 नाम की जर्मन पनडुब्बी (submarine) पड़ी है, जो 1945 में डूब गई थी। इसमें अभी भी बहुत खतरनाक सामान मौजूद है। 1,867 कंटेनरों में भरा 65 से 67 टन पारा (mercury)। अब नॉर्वे को यह तय करना है कि इसे निकालने के काम के दौरान और ज्यादा प्रदूषण फैलाए बिना कैसे आगे बढ़ा जाए।
दूसरे विश्वयुद्ध में एक गुप्त मिशन पर निकली थी पनडुब्बी – एक रिपोर्ट के अनुसार, दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान U-864 पनडुब्बी फरवरी 1945 में एक गुप्त मिशन पर जर्मनी से निकली थी। इसका मकसद जापान के हथियार उद्योग के लिए विशेषज्ञों, सैन्य उपकरणों और सामान को पहुंचाना था। इस सामान में भारी मात्रा में पारा भी शामिल था। हालांकि, यह पनडुब्बी कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाई।
9 फरवरी 1945 को, ब्रिटिश पनडुब्बी HMS Venturer ने इसे खोज निकाला और डुबो दिया, जब दोनों पनडुब्बियां पानी के नीचे थीं। इसमें सवार सभी 73 लोगों की मौत हो गई और U-864 समुद्र की तलहटी में ही रह गई।
दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान U-864 पनडुब्बी फरवरी 1945 में एक गुप्त मिशन पर जर्मनी से निकली थी। इसका मकसद जापान के हथियार उद्योग के लिए विशेषज्ञों, सैन्य उपकरणों और सामान को पहुंचाना था। इसमें भारी मात्रा में पारा भी शामिल था। हालांकि, यह पनडुब्बी कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाई।
81 साल बाद समस्याएं पैदा कर रही है ये पनडुब्बी – U-864 पनडुब्बी का मलबा 2003 तक नहीं मिला था, जब रॉयल नॉर्वेजियन नेवी के जहाज KNM Tyr ने फेडजे के पास इसका पता लगाया। जांचकर्ताओं ने पाया कि पनडुब्बी दो हिस्सों में टूटी हुई थी और पारे के कई कंटेनर क्षतिग्रस्त हो गए थे।
समस्या यह है कि यह धातु दशकों तक तलछट (sediments) में बनी रह सकती है और मिथाइलमर्करी (methylmercury) में बदल सकती है। यह एक जहरीला यौगिक है जो मछली और शेलफिश में जमा हो सकता है और लाखों लोगों की खाद्य श्रृंखला ( food chain ) में प्रवेश कर सकता है।
पनडुब्बी दो हिस्सों में टूटी हुई थी और पारे के कई कंटेनर क्षतिग्रस्त हो गए थे। यह धातु मिथाइलमर्करी (methylmercury) में बदल सकती है। यह एक जहरीला यौगिक है जो मछली और शेलफिश में जमा हो सकता है और लाखों लोगों की खाद्य श्रृंखला (food chain) में प्रवेश कर सकता है।
नॉर्वे के फेजे (Fedje) द्वीप के पास समुद्र की तलहटी में दूसरे विश्व युद्ध की सबसे खतरनाक विरासतों में से एक मौजूद है, जो 81 सालों से बिना किसी छेड़छाड़ के पड़ी है।
लगभग 490 फीट की गहराई पर U-864 नाम की जर्मन पनडुब्बी (submarine) पड़ी है, जो 1945 में डूब गई थी। इसमें अभी भी एक बेहद खतरनाक सामान मौजूद है। 1,867 कंटेनरों में 72 से 74 US टन पारा (mercury)। अब नॉर्वे को यह तय करना है कि इसे बाहर निकालने के काम के दौरान और ज्यादा प्रदूषण फैलाए बिना आगे कैसे बढ़ा जाए।
समंदर में डूबी पनडुब्बी के 1,867 कंटेनरों में 72 से 74 US टन पारा (mercury)। अब नॉर्वे को यह तय करना है कि इसे बाहर निकालने के काम के दौरान और ज्यादा प्रदूषण फैलाए बिना आगे कैसे बढ़ा जाए।
मलबे से निकाले गए कंटेनरों से रिस रहा था पारा – नॉर्वे के अधिकारी इस बात पर अध्ययन कर रहे हैं कि स्थिति को और खराब किए बिना प्रदूषक को कैसे हटाया जाए। 2026 के ऑपरेशन से पता चला कि यह कितना मुश्किल हो सकता है।
नॉर्वेजियन कोस्टल एडमिनिस्ट्रेशन (Kystverket) ने मलबे से 22 कंटेनर निकाले, लेकिन उनमें से लगभग 80% क्षतिग्रस्त थे और उनसे रिसाव हो रहा था। ऑपरेशन के दौरान कुछ पारा पानी में भी रिस गया क्योंकि तलछट छानने वाला सिस्टम (sediment filtration system) उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर रहा था।
पनडुब्बी को हमेशा के लिए ढकने की सिफारिश – इन नतीजों के बाद अधिकारियों ने पूरे सामान को हटाने के विचार पर फिर से सोचना शुरू किया। 28 अगस्त को, Kystverket ने पनडुब्बी को हमेशा के लिए ढकने और सील करने की सिफारिश की।
उनका निष्कर्ष था कि बड़े पैमाने पर इसे बाहर निकालने के ऑपरेशन (salvage operation) से जितना प्रदूषक हटाया जाएगा, उससे कहीं ज़्यादा प्रदूषक फैल सकता है। इस विकल्प में भी चुनौतियां होंगी-U-864 की लंबे समय तक निगरानी करनी होगी, जिस पर करोड़ों नॉर्वेजियन क्रोनर का खर्च आएगा।
नॉर्वे के पास अब दो विकल्प – फिलहाल, उस इलाके में हुए टेस्ट से पता चलता है कि मछलियों और शेलफिश में मरकरी का लेवल स्थिर या कम है। फिर भी, इसका कोई पक्का समाधान नहीं मिल पाया है।
नॉर्वे को दो विकल्पों में से एक चुनना होगा। या तो वह जहरीले सामान को हटाने की कोशिश करे जो 81 साल से पानी के नीचे है, या फिर पनडुब्बी को वहीं दबा दे और मरकरी को इकोसिस्टम में फैलने से रोकने के लिए पीढ़ियों तक उसकी निगरानी करे।