
नई दिल्ली: दुनिया के सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक राजस्व पैदा करने वाले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई) को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद(आईसीसी) के नए वित्तीय मॉडल के लागू होने पर 19 करोड़ डॉलर तक का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
आईसीसी ने गत सप्ताह दुबई में हुई कार्यकारी समूह की बैठक में सभी पूर्ण सदस्यों के सामने अपना नया वित्तीय मॉडल प्रस्तावित किया था जिसके आधार पर अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की ‘सुपरपावर’को ही भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इस मॉडल के तहत क्रिकेट में ‘बिग थ्री’ बीसीसीआई और इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड(ईसीबी) की कुल हिस्सेदारी का प्रतिशत काफी हद तक गिर जाएगा तो क्रिकेट आस्ट्रेलिया(सीए) को पहले के समान राशि मिलेगी। बीसीसीआई ने कड़े शब्दों में वैश्विक संस्था के इस मॉडल पर अपनी आपत्ति जताई है। क्रिकइंफो की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 के वित्तीय मॉडल की तुलना में अब भारतीय बोर्ड की राजस्व हिस्सेदारी में करीब 8 से 9 फीसदी की कटौती होना तय है।
रिपोर्ट के अनुसार पहले आईसीसी के 2.5 अरब डॉलर के कुल राजस्व में बीसीसीआई की 17.6 से 18 फीसदी तक की हिस्सेदारी थी जो 44.0-44.5 करोड़ डॉलर से अब घटाकर 25.5-26.0 करोड़ डॉलर तक हो जाएगी। बोर्ड को इसके तहत 18 से 19 करोड़ डॉलर का नुकसान सीधे तौर पर होगा जिससे उसकी स्थिति पर निश्चित ही असर पड़ेगा। इसके अलावा ईसीबी की हिस्सेदारी में अब 20 से 30 फीसदी की कटौती होगी जबकि सीए को लगभग समान ही राजस्व मिलेगा। हालांकि आईसीसी के कुल राजस्व में बढ़ोतरी की स्थिति में विभिन्न बोर्डों के राजस्व में भी इजाफा किया जाएगा। आईसीसी के इस नये मसौदे को बैठक में सात सदस्य बोर्डों का समर्थन मिला जबकि दो ने इसका विरोध किया और एक इसमें शामिल नहीं हुआ। अप्रैल में होने वाली बैठक में सदस्य क्रिकेट बोर्ड इस संदर्भ में अपने सुझाव और चिंताएं रखेंगे।
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