
यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को फांसी से सजा से फिलहाल राहत मिली है, अभी भी जिंदगी का खतरा बना हुआ है। पीड़ित परिवार ने ‘दियाह’ से इनकार कर दिया है और निमिषा के लिए ‘किसास’ की मांग की है।
यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को फिलहाल के लिए राहत मिली है। निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को फांसी दी जानी थी, जिसे कुछ समय के लिए टाल दिया गया है। इस बीच भारतीय नर्स की जिंदगी का फैसला दो शब्दों के बीच होना है- दियाह या किसास। निमिषा प्रिया को पूर्व बिजनेस पार्टनर और यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या के जुर्म में मौत की सजा सुनाई गई है। अब तलाल के भाई अब्देल फतेह महदी का बयान आया है, जिसने निमिषा प्रिया के लिए किसास की मांग की है। इसके बाद से इस शब्द को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
तलाल अब्दो महदी के भाई ने उन खबरों पर नाराजगी जताई है कि परिवार ब्लड मनी के बदले फांसी की सजा माफ करना चाहता है। महदी के भाई ने बीबीसी अरबी के साथ बातचीत में बताया कि उनके परिवार की जिंदगी के बदले पैसे में कोई दिलचस्पी नहीं है। उसने यह भी कहा कि वह निमिषा प्रिया के लिए किसास चाहता है, जिसका मतलब है कि वह फांसी की सजा पर अमल चाहता है।
क्या है किसास का कानून? – किसास शब्द कुरान से लिया गया है, जिसका मतलब है बराबर सजा। शरिया या इस्लामी न्यायशास्त्र में इसका मतलब है- आंख के बदले आंख। यह किसी अपराध के मामले में दोषी को पीड़ित के बराबर सजा देने का समर्थन करता है। मतलब हत्या के बदले में मौत की सजा मिलनी चाहिए और महदी का परिवार इसी बात पर जोर दे रहा है। परिवार का मानना है कि निमिषा प्रिया ने हत्या के इरादे से ही तलाल को बेहोशी का इंजेक्शन लगाया और फिर मौत के बाद उसकी बॉडी को ठिकाने लगा दिया।
ब्लड मनी के लिए परिवार तैयार नहीं – निमिषा प्रिया की जान बचाने की उम्मीद अब तक एक दूसरे इस्लामी कानून पर टिकी हुई थी, जिसे अरबी में ‘दिया’ या ‘दियाह’ कहा जाता है। इसका एक प्रचलित नाम ब्लड मनी है, जिसका मतलब है पैसे के बदले में माफी देना। यह सामान्यतः तब दिया जाता है, जब ऐसा अंदेशा हो कि हत्या गलती से की गई है। इसके लिए फैसला करने की पूरी आजादी पीड़ित के परिवार को होती है और समझौता सहमति से होता है।
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