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‘फेमिनिज्म मतलब ये बताना नहीं..’: जौहर विवाद पर बोलीं प्रियंका चतुर्वेदी; यजीदी महिलाओं का इतिहास पुराना नहीं है


फिल्म अभिनेत्री और ऐक्टिविस्ट स्वरा भास्कर ने हाल ही में भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना ‘जौहर’ को जिस तरीके से पेश करने की कोशिश की, उसपर बहुत विवाद हो रहा है। हालांकि, कड़ी आलोचनाओं के बाद स्वरा ने अपनी टिप्पणियों को दाएं-बाएं करने की कोशिशें भी कीं, लेकिन उनके खिलाफ जुबानी हमले कम नहीं हो रहे। शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) पार्टी की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने अब एक अखबार में लेख के माध्यम से ‘जौहर’पर उठाए गए उनके सवालों की सोच पर तीखा हमला किया है।
प्रियंका चतुर्वेदी पहले भी सोशल मीडिया के माध्यम से स्वरा भास्कर के ‘जौहर’ वाले बयान पर बिना नाम लिए निशाना साध चुकी हैं। अब उन्होंने द पायनियर अखबार में लंबे-चौड़े लेख के माध्यम से ‘जौहर’, सती और रेप को एक श्रेणी में रखने वाली उनकी कथित फेमिनिस्ट सोच पर चोट की है।
‘महिला अपनी मर्जी के फैसले के लिए स्वतंत्र’ – प्रियंका चतुर्वेदी ने दलील दी है कि ‘एक साधारण तथ्य है- एक महिला की अपनी मर्जी से फैसला लेने की क्षमता, सिर्फ इसलिए खत्म नहीं हो जाती कि हमें उसका फैसला पसंद नहीं है।’
हम ये नहीं कह सकते है कि जब एक महिला हमारी पसंद का फैसला लेती है तो वह सशक्त है और जब उसका फैसला हमें पसंद नहीं आता, तो उसका ब्रेनवॉश किया गया है। प्रियंका चतुर्वेदी, पूर्व राज्यसभा सांसद
‘यजीदी महिलाओं ने भी मरना पसंद किया’ – उनके मुताबिक, ‘यदि हम महिलाओं के शरीर से जुड़ी हर ऐतिहासिक प्रथा को पितृसत्ता नाम की सुविधाजनक श्रेणी में रख देंगे, तो हम इतिहास नहीं समझ पाएंगे और समकालिक दलीलों के लिए इतिहास का इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे।’
बहुत ज्यादा दिन नहीं हुए, 2014 में इराक के सिंजार इलाके में नरसंहार के दौरान कई यजीदी महिलाओं और लड़कियों ने अपनी मौत को गले लगाना पसंद किया, बजाए आईएसआईएस के आतंकवादियों के हाथों सुनियोजित बलात्कार, प्रताड़ना और जबरन धर्मांतरण सहने के। प्रियंका चतुर्वेदी, पूर्व राज्यसभा सांसद
‘महिलाओं पर अपना पसंद थोपना फेमिनिज्म नहीं’ – पूर्व सांसद का कहना है,’फेमिनिज्म का लक्ष्य यह नहीं हो सकता कि महिलाओं को बताएं कि सही पसंद क्या है। इसका लक्ष्य ऐसी दुनिया बनाना होना चाहिए, जिसमें महिलाओं के पास ऐसे विकल्प मौजूद हों, जिससे उन्हें अपनी जिंदगी और गरिमा के बीच चुनाव न करना पड़े। हमें ऐसी दुनिया के लिए लड़ना चाहिए। किसी और दौर की महिलाओं की पसंद को फिर से लिखने के लिए नहीं।’
‘सवाल हमलावरों की मानसिकता का होना चाहिए’ – प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि ‘जौहर या यजीदी महिलाओं के मामले की त्रासदी ये नहीं है कि उन्होंने मौत चुनी।’
‘त्रासदी शायद ये है कि जिस दुनिया में वो रहती थीं, उसने उन्हें सिर्फ एक ही भयानक विकल्प दिया।’
‘सवाल महिलाओं का नहीं, बल्कि ऐसे हमलावरों की मानसिकता का होना चाहिए, जो महिलाओं को अपनी की खुशी के लिए संपत्ति की तरह देखते थे।’