
ईरान पर हथियार प्रतिबंध को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका ने जमकर भड़ास निकाली। अमेरिका की ओर से पक्ष रखते हुए विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने बार-बार भारत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ईरान भारत और ऑस्ट्रेलिया की तरह जिम्मेदार लोकतंत्र नहीं है। इसलिए, उसे हथियारों के खरीद से रोकने के लिए प्रतिबंध अवधि को बढ़ाया जाना चाहिए।
पोम्पियो ने दूसरी बार भारत का किया जिक्र
पोम्पिओ ने दूसरी बार भारत का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा न करने पर ईरान रूस निर्मित लड़ाकू विमानों खरीदने के लिए स्वतंत्र हो जाएगा जो रियाद, नई दिल्ली, रोम और वारसा को ईरान के निशाने पर ले आएगा। बता दें कि ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली खमनेई ने कश्मीर को लेकर कई बार भारत की आलोचना की है।
18 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है प्रतिबंध
मंगलवार की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की डिजिटल बैठक में पोम्पियो ने कहा कि पूर्व अमेरिकी प्रशासन द्वारा खामियों से भरा परमाणु करार करने की वजह से, विश्व के सबसे नृशंस आतंकवादी शासन पर लगाए गए हथियार प्रतिबंध की अवधि 18 अक्टूबर यानि अब से केवल चार महीने में समाप्त हो रही है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास एक ही विकल्प है- या तो वह अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के पक्ष में खड़ा हो या संयुक्त राष्ट्र के मिशन का विश्वासघात कर ईरान पर हथियार प्रतिबंध समाप्त होने दे।
रूस निर्मित लड़ाकू विमान खरीद सकता है ईरान
उन्होंने यूएनएससी सदस्य देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आप कार्रवाई करने में विफल रहते हैं तो ईरान रूस निर्मित लड़ाकू विमान खरीदने के लिए स्वतंत्र हो जाएगा, जो 3,000 किलोमीटर तक के दायरे में हमला कर सकते हैं, जिससे रियाद, नई दिल्ली, रोम और वारस ईरान के निशाने पर आ सकते हैं। बताया जा रहा है कि ईरान रूस से एसयू-30 विमानों को खरीदने की योजना बना रहा है।
अंतरराष्ट्रीय पोत परिवहन पर संकट बढ़ेगा
अमेरिका के शीर्ष राजनयिक ने कहा कि अगर हथियार प्रतिबंधों की अवधि बढ़ाई नहीं गई तो ईरान अंतरराष्ट्रीय पोत परिवहन को और जोखिम में डालने के लिए अपनी पनडुब्बियों के बेड़े बढ़ा लेगा और उसे हरमूज जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी और अरब सागर में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए और खतरा बढ़ा देगा।
ईरान से पश्चिम एशिया में आर्थिक स्थिरता को खतरा
उन्होंने कहा कि ईरान पश्चिम एशिया की आर्थिक स्थिरता को जोखिम में डाल सकता है जो रूस और चीन जैसे राष्ट्रों के लिए खतरा उत्पन्न करेगा जो स्थिर ऊर्जा कीमतों पर निर्भर रहते हैं। ईरान हथियारों का दुष्ट सौदागार बन सकता है, वेनेजुएला से लेकर सीरिया से अफगानिस्तान तक संघर्षों को बढ़ावा देने के लिए हथियारों की आपूर्ति कर सकता है।
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