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21 जून 1975 को वेस्टइंडीज बना वर्ल्ड चैंपियन

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जानिए जून की इन चार तारीखों ने कैसे बना दिया इन तीन टीमों को वर्ल्ड चैंपियन
हर महीने किसी न किसी वजह से खास है, इसी तरह जून का महीना भी कुछ क्रिकेट टीमों के लिए खास है। इस महीने में भारत, वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया ने वर्ल्ड क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई थी, नया इतिहास रचा था। यह महीना इन टीमों के लिए इतना खास है कि चाहते हुए यह टीम इस महीने को भूल नहीं सकते। चलिए जानते हैं क्यों यह महीना है इन टीमों के लिए खास।
जून का महीना वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के लिए इसलिए खास है क्योंकि 21 जून 1975 को वेस्टइंडीज टीम पहला वर्ल्ड कप जीतने का गौरव हासिल किया था। इंग्लैंड के लॉर्ड्स के मैदान पर वेस्टइंडीज क्रिकेट का भगवान बन गया था। ऑस्ट्रेलिया को 17 रन से हराकर वेस्टइंडीज ने वर्ल्ड क्रिकेट में एक नया इतिहास रचा। फाइनल मैच में वेस्टइंडीज टॉस हारा था और पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 60 ओवर में 291 रन बनाया था. इस मैच में वेस्टइंडीज के कप्तान क्लाइव लॉयड ने सबको हैरान करते हुए वर्ल्ड कप फाइनल का पहला शतक ठोका, वह भी तेज खेलते हुए। लॉयड ने सिर्फ 85 गेंदों का सामना करते हुए 12 चौके और दो छक्के के बदौलत शानदार 102 रन बनाए थे। इस मैच में ऑस्ट्रेलिया के पांच खिलाड़ी रन आउट हुए थे और विवियन रिचर्ड्स ने तीन खिलाड़ियों को रन आउट करते हुए ऑस्ट्रेलिया से मैच छीन लिया था। ऑस्ट्रेलिया इस मैच में 274 रन पर ऑल आउट हो गया था।

23 जून 1979 को वेस्टइंडीज लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप चैंपियन बना
23 जून 1979, इंग्लैंड का लॉर्ड्स के मैदान, वेस्टइंडीज लगातार दोबारा फाइनल में पहुंचा था लेकिन सामने ऑस्ट्रेलिया नहीं बल्कि इंग्लैंड था। इंग्लैंड की टीम उस वक्त वर्ल्ड क्रिकेट में अपना नाम जमा चुकी थी। ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड अपने घरेलू मैदान और घरेलू दर्शकों के सामने वर्ल्ड कप जीतने का गौरव हासिल करेगा। इस मैच में भी वेस्टइंडीज ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी की थी। विवियन रिचर्ड्स की शानदार शतक बदौलत वेस्टइंडीज ने इंग्लैंड के सामने 287 रन का लक्ष्य रखा था। इंग्लैंड धांसू शुरुआत करते हुए मैदान में मौजूद दर्शकों की ताली बटौर रहा था। पहले विकेट के लिए जैफ बॉयकॉट और माइक ब्रेयरली के बीच शानदार 129 रन की साझेदारी हुई थी। लेकिन इंग्लैंड के किस्मत में वर्ल्ड कप हासिल करना नहीं लिखा हुआ था। इंग्लैंड ने अपने अंतिम आठ विकेट सिर्फ 11 रन में गवां दिए और 194 रन पर ऑल आउट हो गया। वेस्टइंडीज की तरफ से जोएल गार्नर ने घातक गेंदबाज़ी करते हुए 11 ओवर में 38 रन देकर पांच विकेट हासिल किये थे और वेस्टइंडीज के लिए जीत का सूत्र धार साबित हुए थे।

25 जून 1983 को भारत ने रचा इतिहास
25 जून 1983 को भारत ने वर्ल्ड क्रिकेट में अपनी पहचान बनाते हुए वर्ल्ड कप जीतने का इतिहास रचा। पहले दो फाइनल की तरह यह भी शनिवार का दिन था और सामने दो बार वर्ल्ड कप हासिल कर चुकी वेस्टइंडीज की टीम थी। ऐसा लग रहा था लॉर्ड्स का इस मैदान पर वेस्टइंडीज तीसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनेगा और यह सही साबित होने लगा जब भारत की पूरी टीम सिर्फ 183 पर ऑल आउट हो गयी। लेकिन भारत को कुछ खोना ही नहीं था क्योंकि फाइनल में पहुँचना ही भारत के लिए गौरव की बात थी। भारत के खिलाड़ियों के ऊपर कोई दवाब भी नहीं था और इसका फ़ायदा उठाते हुए भारत ने अनहोनी को होनी करते हुए इस मैच को जीता और वर्ल्ड क्रिकेट में एक नया इतिहास रचा। भारत के गेंदबाज़ों ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए पूरी वेस्टइंडीज टीम को सिर्फ 140 रन पर आउट कर दिया। फाइनल मैच में शानदार प्रदर्शन कि वजह से महिंदर अमरनाथ को “मैन ऑफ़ द मैच” का अवार्ड से नवाजा गया।

20 जून 1999 को ऑस्ट्रेलिया ने दोहराया इतिहास
20 जून 1999 को इंग्लैंड के लॉर्ड्स के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड कप फाइनल मैच खेला गया था। दोनों टीम पहले एक-एक बार वर्ल्ड कप जीत चुके थे। 1987 में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को हराकर पहली बार वर्ल्ड कप हासिल किया था तो 1992 में पाकिस्तान इंग्लैंड को मात देते हुए एक बार वर्ल्ड कप जीतने का गौरव हासिल कर चुका था। दोनों टीम दोबारा वर्ल्ड कप जीतने के लिए खेल रहे थे। पाकिस्तान ने टॉस जीता था और पहले बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 132 रन पर ऑल आउट हो गया था और ऑस्ट्रेलिया सिर्फ 20 ओवर में दो विकेट पर यह लक्ष्य हासिल कर लिया था और वेस्टइंडीज के बाद दो बार वर्ल्ड कप जीतने का गौरव हासिल किया था।

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